महामीडिया न्यूज सर्विस
गाजियाबाद के निकेश अरोड़ा को मिला 6.7 करोड़ सालाना का पैकेज

गाजियाबाद के निकेश अरोड़ा को मिला 6.7 करोड़ सालाना का पैकेज

admin | पोस्ट किया गया 105 दिन 13 घंटे पूर्व
08/06/2018
नई दिल्ली (महामीडिया) टेक्नोलॉजी सेक्टर के दिग्गज निकेश अरोड़ा को पालो अल्टो नेटवर्क का सीईओ बना दिया गया है. पालो अल्टो नेटवर्क एक साइबर सिक्योरिटी कंपनी है. बता दें कि निकेश का टेक्नोलॉज़ी सेक्टर में लंबा करियर रहा है. पालो अल्टो नेटवर्क से पहले वे सॉफ्ट बैंक और गूगल में भी काम कर चुके हैं. निकेश का सालाना वेतन 6.7 करोड़ रुपए होगा. वहीं, इतना ही उन्‍हें बोनस भी मि‍लेगा. इसके अलावा उन्हें कंपनी की ओर से 268 करोड़ रुपए के शेयर मिलेंगे, जिन्हें वो 7 साल तक नहीं बेच सकते. ऐसे में अगर निकेश अरोड़ा पालो अल्टो नेटवर्क के शेयर की कीमत 7 सालों के अंदर 300 फ़ीसदी बढ़ाने में कामयाब रहे तो उन्‍हें 442 करोड़ रुपए और मिलेंगे. इसके साथ ही निकेश अपने पैसे से पालो अल्टो नेटवर्क के 134 करोड़ रुपए के शेयर खरीद सकते हैं और इतनी ही कीमत के शेयर उन्हें कंपनी की ओर से दिए जाएंगे, जि‍न्‍हें वे सात साल तक बेच नहीं पाएंगे. इसके साथ ही निकेश अपने पैसे से पालो अल्टो नेटवर्क के 134 करोड़ रुपए के शेयर खरीद सकते हैं और इतनी ही कीमत के शेयर उन्हें कंपनी की ओर से दिए जाएंगे, जि‍न्‍हें वे सात साल तक बेच नहीं पाएंगे. निकेश अरोड़ा ने कंपनी में मार्क मिकलॉकलीन की जगह ली है. मार्क 2011 से पालो अल्टो नेटवर्क के सीईओ थे. हालांकि‍ मार्क अब भी कंपनी के बोर्ड वाइस चेयरमैन बने रहेंगे. वहीं, निकेश अरोड़ा बोर्ड के चेयरमैन भी होंगे. बोर्ड में भी मिली जगह: निकेश अरोड़ा ने कंपनी में मार्क मिकलॉकलीन की जगह ली है. मार्क 2011 से पालो अल्टो नेटवर्क के सीईओ थे. हालांकि‍ मार्क अब भी कंपनी के बोर्ड वाइस चेयरमैन बने रहेंगे. वहीं, निकेश अरोड़ा बोर्ड के चेयरमैन भी होंगे. 50 साल के निकेश अरोड़ा का जन्म 6 फरवरी 1968 को उत्तर प्रदेश के गाजि‍याबाद में हुआ था. निकेश के पिता इंडियन एयरफ़ोर्स में ऑफिसर थे. निकेश ने स्कूल की पढ़ाई दिल्ली में एयरफ़ोर्स के स्कूल से की थी. इसके बाद उन्होंने ग्रैजुएशन बीएचयू आईटी से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में 1989 में किया था. ग्रैजुएशन के ठीक बाद विप्रो में नौकरी शुरू की, लेकिन उन्होंने जल्द ही नौकरी छोड़ दी. नौकरी छोड़ने के बाद निकेश आगे की पढ़ाई करने अमेरिका चले गए. निकेश ने बोस्टन की नॉर्थ-ईस्टर्न यूनिवर्सिटी से एमबीए किया. कौन हैं नीकेश अरोड़ा: 50 साल के निकेश अरोड़ा का जन्म 6 फरवरी 1968 को उत्तर प्रदेश के गाजि‍याबाद में हुआ था. निकेश के पिता इंडियन एयरफ़ोर्स में ऑफिसर थे. निकेश ने स्कूल की पढ़ाई दिल्ली में एयरफ़ोर्स के स्कूल से की थी. इसके बाद उन्होंने ग्रैजुएशन बीएचयू आईटी से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में 1989 में किया था. ग्रैजुएशन के ठीक बाद विप्रो में नौकरी शुरू की, लेकिन उन्होंने जल्द ही नौकरी छोड़ दी. नौकरी छोड़ने के बाद निकेश आगे की पढ़ाई करने अमेरिका चले गए. निकेश ने बोस्टन की नॉर्थ-ईस्टर्न यूनिवर्सिटी से एमबीए किया. कई लोगों के लिए यह फ़ैसला हैरान करने वाला है. क्रेडिट स्विस के एनलिस्ट ब्रैड जेलनिक ने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा कि अरोड़ा के पास साइबर सिक्योरिटी का कोई अनुभव नहीं है. 2014 में अरोड़ा ने सॉफ्ट बैंक जॉइन किया. सॉफ्ट बैंक में उन्हें ग्लोबल इंटरनेट इन्वेस्टमेंट प्रमुख की जि‍म्मेदारी मिली थी. निकेश को भारत और इंडोनेशिया में इंटरनेशनल इंटरनेट में निवेश का श्रेय दिया जाता है. उनके बढ़ते कद का ही यह प्रमाण है कि उन्हें सॉफ्ट बैंक के बोर्ड में शामिल कर लिया गया. लोग हैं हैरान: कई लोगों के लिए यह फ़ैसला हैरान करने वाला है. क्रेडिट स्विस के एनलिस्ट ब्रैड जेलनिक ने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा कि अरोड़ा के पास साइबर सिक्योरिटी का कोई अनुभव नहीं है. 2014 में अरोड़ा ने सॉफ्ट बैंक जॉइन किया. सॉफ्ट बैंक में उन्हें ग्लोबल इंटरनेट इन्वेस्टमेंट प्रमुख की जि‍म्मेदारी मिली थी. निकेश को भारत और इंडोनेशिया में इंटरनेशनल इंटरनेट में निवेश का श्रेय दिया जाता है. उनके बढ़ते कद का ही यह प्रमाण है कि उन्हें सॉफ्ट बैंक के बोर्ड में शामिल कर लिया गया. निकेश ने करियर में उस वक़्त छलांग आई जब उन्हें गूगल में नौकरी मिली. निकेश 2004 से 2007 सात तक गूगल के यूरोप ऑपरेशन के प्रमुख रहे थे. 2011 में वो गूगल में चीफ बिजनेस ऑफिसर बन गए और इसके साथ ही उस श्रेणी में आ गए जिन्हें गूगल सबसे ऊंची पगार देती है. गूगल और सॉफ्ट बैंक में कि‍या काम: निकेश ने करियर में उस वक़्त छलांग आई जब उन्हें गूगल में नौकरी मिली. निकेश 2004 से 2007 सात तक गूगल के यूरोप ऑपरेशन के प्रमुख रहे थे. 2011 में वो गूगल में चीफ बिजनेस ऑफिसर बन गए और इसके साथ ही उस श्रेणी में आ गए जिन्हें गूगल सबसे ऊंची पगार देती है.
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