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विशिष्ट अभिनय शैली के धनी थे संजीव कुमार

विशिष्ट अभिनय शैली के धनी थे संजीव कुमार

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 438 दिन 10 घंटे पूर्व
09/07/2018
मुंबई (महामीडिया) हिन्दी फिल्मों के प्रसिद्ध लोकप्रिय अभिनेता संजीव कुमार का आज जन्मदिन है। संजीव कुमार का जन्म मुंबई में 9 जुलाई 1938 को एक मध्यम वर्गीय गुजराती परिवार में हुआ था। उनका पूरा नाम हरीभाई जरीवाला था। इनका पैतृक निवास सूरत में था, बाद में इनका परिवार मुंबई आ गया। 1960 में उन्हें फ़िल्मालय बैनर की फ़िल्म हम हिन्दुस्तानी में एक छोटी सी भूमिका निभाई। उन्होंने स्मगलर, पति-पत्नी, हुस्न और इश्क, बादल, नौनिहाल और गुनहगार जैसी कई फ़िल्मों में अभिनय किया लेकिन इनमें से कोई भी फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हुई। संजीव कुमार वर्ष 1968 में प्रदर्शित फ़िल्म शिकार में पुलिस ऑफिसर की भूमिका में छाप छोड़ने में कामयाब रहे। इस फ़िल्म में उनके दमदार अभिनय के लिये उन्हें सहायक अभिनेता का फ़िल्मफेयर अवार्ड भी मिला। 1968 में प्रदर्शित फ़िल्म संघर्ष में संजीव कुमार ने अपनी छोटी-सी भूमिका के बावजूद दर्शकों की वाहवाही लूट ली। इसके बाद आशीर्वाद, राजा और रंक, सत्यकाम और अनोखी रात जैसी फ़िल्मों में मिली कामयाबी से संजीव कुमार दर्शकों के बीच अपने अभिनय की धाक जमाते हुए ऐसी स्थिति में पहुँच गये जहाँ वे फ़िल्म में अपनी भूमिका स्वयं चुन सकते थे। उन्होंने नया दिन नई रात फ़िल्म में नौ रोल करके सबको आश्चर्यचकित कर दिया था। वर्ष 1970 में प्रदर्शित फ़िल्म खिलौना की जबर्दस्त कामयाबी के बाद संजीव कुमार ने बतौर अभिनेता अपनी अलग पहचान बना ली। वर्ष 1970 में ही प्रदर्शित फ़िल्म दस्तक में उनके लाजवाब अभिनय के लिये सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। फ़िल्म कोशिश में गूँगे की चुनौतीपूर्ण भूमिका निभाई। बगैर संवाद बोले सिर्फ आँखों और चेहरे के भाव से दर्शकों को सब कुछ बता देना संजीव कुमार की अभिनय प्रतिभा का ऐसा उदाहरण था जिसे शायद ही कोई अभिनेता दोहरा पाये। इनकी हिट फ़िल्म सीता और गीता और मनचली प्रदर्शित हुईं। 70 के दशक में उन्होने गुलज़ार के साथ कुल 9 फ़िल्में कीं जिनमे आंधी, मौसम, अंगूर, नमकीन ने सफलता पाई। 1975 में फ़िल्म शोले में उनके द्वारा निभाया गया ठाकुर का किरदार आज भी लोगों के बीच जीवंत है। संजीव कुमार आजीवन कुंवारे रहे और मात्र 47 वर्ष की आयु में साल 1984 में हृदय गति के रुक जाने से उनका निधन हो गया। इस महान कलाकार का नाम फ़िल्मजगत की आकाशगंगा में अपने व्यव्हार, विशिष्ट अभिनय शैली के लिए जाना जाता है।
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