महामीडिया न्यूज सर्विस
चातुर्मास में सात्विक धर्म का पालन करना चाहिए

चातुर्मास में सात्विक धर्म का पालन करना चाहिए

admin | पोस्ट किया गया 422 दिन 6 घंटे पूर्व
23/07/2018
भोपाल (महामीडिया) देवशयनी एकादशी के साथ ही चातुर्मास प्रारंभ हो गये हैं। इस बार देवशयनी एकादशी से देवउत्थान एकादशी तक यानि 19 नवम्बर 2018 तक चातुर्मास रहेगा। चातुर्मास में हमारा आचरण व क्रियाकलाप सात्विक होने चाहिए। इस अवधि में भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इस अवधि में कुछ खादय सामग्रियों का सेवन करना वर्जित माना गया है। जैसे सावन मास में साग-सब्जी, भाद्रपद मास में दही, अश्वनी मास में दूध और कार्तिक मास में दालें नहीं ग्रहण करनी चाहिए। चातुर्मास का व्रत करने वाले व्यक्ति को चारपाई पर सोना, मांस मदिरा का सेवन करना भी वर्जित होता है। इस अवधि में जमीन पर शयन करना चाहिए और पूर्णतः शाकाहारी भोजन करना चाहिए। चातुर्मास को शत्रु नाश की अवधि भी कहते हैं। चातुर्मास में ईश्वर की आराधना में पुरुष सूक्त, विष्णु सहस्रनाम अधिकार का नित्य पाठ करना चाहिए और ओम नमो भगवते वासुदेवाय या विष्णु गायत्री मंत्र का जप करना चाहिए। इस अवधि में व्रत का भी बड़ा महत्व है और उसके भिन्न-भिन्न स्वरुप है। दिन में 1 बार भोजन करने से, लगातार उपवास कर के चौथे दिन भोजन करने से, और सप्ताह में एक दिन भोजन करने से अलग-अलग लाभ होता है। चातुर्मास के हर माह में अलग अलग देवी देवता की पूजा करनी चाहिए। इसके अलग-अलग लाभ भी प्राप्त होते हैं। जैसे आषाढ़ के महीने में भगवान वामन और गुरु पूजा करनी चाहिए। वहीं सावन के महीने में भगवान शिव की उपासना करनी चाहिए। भाद्रपद में भगवान कृष्ण का जन्म होता है और उनकी पूजा अर्चना होती है। आश्विन के महीने में देवी के शक्ति रूप की उपासना करनी चाहिए। चौथे माह यानि कार्तिक माह में देवउत्थान एकादशी को पुनः भगवान विष्णु जी की पूजा अर्चना की जाती है।
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