महामीडिया न्यूज सर्विस
क्या करें यदि कोई गवर्नेंस ही न हो - सुप्रीम कोर्ट

क्या करें यदि कोई गवर्नेंस ही न हो - सुप्रीम कोर्ट

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 62 दिन 16 घंटे पूर्व
17/08/2018
नई दिल्ली    (महामीडिया)  केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट के जज और सीनियर वकीलों कहा था कि न्यायपालिका को कार्यपालिका और नीतियों के मामले पर हस्तक्षेप से संयम बरतना चाहिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सवाल किया कि कोर्ट तब क्या करे, जब कार्यपालिका काम न कर रही हो और सरकार की निष्क्रियता की वजह से नागरिकों के अधिकारों का हनन हो रहा हो।स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सुप्रीम कोर्ट परिसर में हुए कार्यक्रम में बोलते हुए बुधवार को कानून मंत्री ने यह बात कही थी। उन्होंने कहा था कि सरकार चलाने का काम उन लोगों पर छोड़ देना चाहिए, जिन्हें लोगों ने इसके लिए चुना है। न्यायपालिका को राज्य के तीनों अंगों के बीच कानून को अलग रखने का सम्मान करना चाहिए।केंद्र की महत्वकांक्षी नेशनल अर्बन लाइवलीहुड मिशन प्रोग्राम से जुड़ी एक पीआईएल पर सुनवाई करते हुए जस्टिस मदन बी लोकुर, एस अब्दुल नजीर और दीपक गुप्ता की बेंच ने पीड़ा व्यक्त की। न्यायाधीशों ने कहा कि केंद्र और राज्य सड़कों पर रहने वाले बेघर लोगों को छत मुहैया कराने में असफल हुई है।कानून मंत्री की टिप्पणी पर सीधी प्रतिक्रिया देने से बचते हुए जस्टि लोकुर ने कहा, 'हमें बताया गया है कि गवर्नेंस का काम सरकार का है। इसमें हम कुछ नहीं कर सकते, लेकिन यहां कोई गवर्नेंस नहीं है। ऐसी स्थिति में हमें क्या करना चाहिए। बताते चलें कि स्वतंत्रता दिवस पर कानून मंत्री के भाषण के दौरान जस्टिस लोकुर भी वहां मौजूद थे।2013 में बेघरों को छत मुहैया कराने के सरकार के कार्यक्रम पर कोर्ट भी नजर बनाए हुए है। कई सालों में इस स्कीम के लिए 2000 करोड़ रुपए भी दिए गए हैं, लेकिन बेघर अब भी सड़कों पर रहने को मजबूर हैं। 
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