महामीडिया न्यूज सर्विस
भगवान श्रीकृष्ण के प्रगट उत्सव के दिन को जन्माष्टमी कहते हैं

भगवान श्रीकृष्ण के प्रगट उत्सव के दिन को जन्माष्टमी कहते हैं

admin | पोस्ट किया गया 173 दिन 11 घंटे पूर्व
27/08/2018
भोपाल (महामीडिया) भाद्रपद माह का सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार जन्माष्टमी है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है। जन्माष्टमी इस बार 3 सितंबर को है। अष्ठमी की रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का संकेतिक रूप से जन्म होने पर व्रत का परायण करते हैं। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रात के बारह बजे मथुरा के राजा कंस की जेल में वासुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से सोलह कलाओं से युक्त भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। शास्त्रों में जन्माष्टमी व्रत को व्रतराज कहा जाता है। जन्माष्टमी व्रत तिथि व शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं।
जन्माष्टमी व्रत तिथि - 2 सितंबर 2018
निशिथ पूजा- 23:57 से 00:43
पारण- 20:05 (3 सितंबर) के बाद
रोहिणी समाप्त- 20:05 (3 सितंबर 2018)
अष्टमी तिथि आरंभ- 20:47 (2 सितंबर 2018)
अष्टमी तिथि समाप्त- 19:19 (3 सितंबर 2018)
जन्माष्टमी वाले दिन सुबह से ही मंदिरो की साफ-सफाई करते है, वंदनवार बाधते है बाल गोपाल जी की मूर्ति को दूध, दही से नहलाकर नई पोशाक व मुकुट और माला, मोरपंख, मुरली से श्राङ्गार भी करते है। पूजन में देवकी, वसुदेव, बलदेव, नंद, यशोदा और लक्ष्मी इन सबका नाम क्रमशः लेना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण की पूजा में तुलसी का बहुत महत्व है। भगवान को भोग लगाने से पहले उसमें तुलसी का पत्ता जरूर डालना चाहिए। इसे बिना आपकी पूजा अधूरी मानी जाएगी। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर भगवान कान्हा की मोहक छवि देखने के लिए दूर दूर से श्रद्धालु जन्माष्टमी के दिन मथुरा पहुंचते हैं। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर मथुरा कृष्णमय हो जाता है। अष्टमी तिथि का महत्व इसलिये है क्योंकि वह वास्तविकता के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष स्वरूपों में सुन्दर संतुलन को दर्शाता है। 
और ख़बरें >

समाचार

MAHA MEDIA NEWS SERVICES

Sarnath Complex 3rd Floor,
Front of Board Office, Shivaji Nagar, Bhopal
Madhya Pradesh, India

+91 755 4097200-16
Fax : +91 755 4000634

mmns.india@gmail.com
mmns.india@yahoo.in