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'अहिंसा' की अनूठी विचाराधारा ने 'बापू' को सिनेमा में भी कर दिया अमर

'अहिंसा' की अनूठी विचाराधारा ने 'बापू' को सिनेमा में भी कर दिया अमर

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 353 दिन 10 घंटे पूर्व
02/10/2018
भोपाल (महामीडिया) किसी भी प्रकार के अत्याचार का जवाब अहिंसा से देने की अनूठी विचारधारा ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को ना सिर्फ़ हमारे देश में बल्कि विश्व का सार्वभौमिक नेता बना दिया। साबरमती के इस महान संत का प्रभाव दशकों बाद आज भी बना हुआ है।  इसी कारण भारतीय सिनेमा ने कभी महात्मा गांधी के किरदार को तो कभी उनकी विचारधारा को अलग-अलग रूप में पिरोया है। सन् 1954 में आयी सत्येन बोस की फ़िल्म जागृति का गीत 'दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल...' महात्मा गांधी की विचारधारा और जीवन दर्शन को समझाने के लिए काफ़ी है। महात्मा गांधी ने अहिंसा के प्रयोग से ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला कर रख दी। संजय दत्त की सबसे यादगारों फ़िल्मों में लगे रहो मुन्नाभाई में महात्मा गांधी की सीख को बहुत ही मनोरंजक तरीक़े से फिल्माया गया था और ?गांधीगिरी? के कॉन्सेप्ट ने देशभर में लोकप्रियता पायी थी। मराठी एक्टर दिलीप प्रभावलकर ने गांधी बनकर फ़िल्म को एक अलग पहचान दी थी। एक अन्य फिल्म अब्बास ख़ान की 'गांधीः माई फादर' में दर्शन ज़रीवाला ने बापू पात्र निभाया है। एक पिता और राष्ट्रपिता के बीच के अंतर्द्वंद्व बखूबी उभारने के लिए दर्शन ज़रीवाला ने बहुत वाह-वाही लूटी। सन् 1996 में आयी श्याम बेनेगल की फ़िल्म 'द मेकिंग ऑफ़ महात्मा' में गांधी जी का किरदार रजित कपूर ने निभाया था। उक्त फिल्म में मोहनदास करमचंद गांधी के महात्मा गांधी बनने के सफ़र पर प्रकाश डाला गया। साउथ अफ़्रीका में गांधी जी का 21 साल का प्रवास कहानी का मुख्य आधार बना। कमल हासन की फ़िल्म 'हे राम' में महात्मा गांधी का किरदार नसीरुद्दीन शाह ने निभाया। जिस ब्रिटिश हुकूमत के विरूद्ध हिंदुस्तान ने स्वतंत्रता की बहुत लंबी लड़ाई लड़ी उसी देश के एक कलाकार ने महात्मा गांधी का पात्र निभाकर सिनेमा को अमर किया। सन् 1982 में रिचर्ड एटनबरो की फिल्म 'गांधी' में गांधी जी का पात्र बेन किंग्सले ने निभाया था और उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का ऑस्कर भी मिला था। 

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