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नवरात्र में क्यों उगाए जाते हैं 'जवारे'

नवरात्र में क्यों उगाए जाते हैं 'जवारे'

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 8 दिन 16 घंटे पूर्व
09/10/2018
भोपाल   (महामीडिया)     पूरे भारतवर्ष में नवरात्र में देवी के सामने अखंड दीपक जलाकर किसी पात्र में अनाज बोकर जवारे उगाए जाते हैं। नौ दिनों में अंकुरित होकर 'जवारा' कहलाने वाले इन नन्हे रोपों की नवरात्र में बहुत महत्ता है। नौ दिन पूरे होने के बाद कुछ 'जवारे' भंडारगृह में और शेष को किसी जलाशय में विसर्जित करने की प्रथा बहुत प्राचीन काल से चली आ रही है। 'जवारों' को शुभता और घर में सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।घटस्थापना के समय जवारे का अपना महत्व है। 'जवारे' को माता अन्नापूर्णा का प्रतीक माना जाता है। स्थापना इसलिए आवश्यक है कि माता अन्नापूर्णा की कृपा परिवार पर हमेशा बनी रहे।घट स्थापना के शुभ मुहूर्त में पूर्वाभिमुख होकर पूर्व दिशा के मध्य में ईशान कोण की सीध में मध्य क्रम से शुद्ध मिट्टी को मिट्टी के पात्र में जमा दें। वैसे तो तीर्थ की शुद्ध मिट्टी को पवित्र माना गया है। मिट्टी पर जौ के दाने को माता अन्नापूर्णा का ध्यान करके डालें। साथ ही एक कलश को जल से भरकर रखें। संभव हो सके तो कलश के ऊपर जौ वाले पात्र को रखें। माता अन्नापूर्णा की तस्वीर भी रख सकते हैं।भगवती पराअम्बा के एक स्वरूप अन्नापूर्णा का 'जवारे' के रूप में स्थापित होना सुखशांति का संकेत माना जाता है। नौ दिवस पर्यन्त 'जवारा' पूजन के बाद भंडारगृह में रखना चाहिए। वायव्य कोण  अधिक श्रेष्ठ मानी गई है। इस कोण में शुभ या लाभ के चौघड़िया में रखने से आर्थिक प्रगति भी होती है।


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