महामीडिया न्यूज सर्विस
"नवरात्रि" एक सनातन भारतीय पर्व है

"नवरात्रि" एक सनातन भारतीय पर्व है

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 252 दिन 19 घंटे पूर्व
10/10/2018
भोपाल (महामीडिया) हमारे देश में नवरात्रि पर्व सनातन काल से मनाया जाता रहा है। नवरात्रि में देवियों के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है जिन्हें नवदुर्गा कहा जाता है। हमारी चेतना में भी 3 तरह के गुण पाये जाते हैं इन ९ दिनों में पहले तीन दिन तमोगुणी प्रकृति की आराधना करते हैं, दूसरे तीन दिन रजोगुणी और आखरी तीन दिन सतोगुणी प्रकृति की आराधना करते हैं। शारदीय नवरात्रि प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाता है। इस व्रत के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान आदि करके पर ही माता की चौकी स्थापित करनी चाहिए। माता की चौकी को स्थापित करने के दौरान गंगाजल, रोली, मौली, पान, सुपारी, धूपबत्ती, घी का दीपक, फल, फूल की माला, बिल्वपत्र, चावल, केले का खम्भा, चंदन, घट, नारियल, आम के पत्ते, हल्दी की गांठ, पंचरत्न, लाल वस्त्र, चावल से भरा पात्र, जौ, बताशा, सुगन्धित तेल, सिंदूर, कपूर, पंच सुगन्ध, नैवेद्य, पंचामृत, दूध, दही, मधु, चीनी, गाय का गोबर, दुर्गा जी की मूर्ति, कुमारी पूजन के लिए वस्त्र, आभूषण तथा श्रृंगार सामग्री उपलब्ध होनी चाहिए। इसके बाद माता की सुननी चाहिए। फिर माता की आरती करें और उसके बाद देवीसूक्तम का पाठ अवश्य करें। देवीसूक्तम का श्रद्धा व विश्वास से पाठ करने पर अभीष्ट फल प्राप्त होता है। 
"या देवी सर्वभुतेषु चेतनेत्यभिधीयते" 
"सभी जीव जंतुओं में चेतना के रूप में ही माँ / देवी तुम स्थित हो।" ऐसा माना जाता है कि भगवान राम ने सबसे पहले समुद्र के किनारे शारदीय नवरात्रों की पूजा की शुरूआत की थी। लगातार नौ दिन की पूजा के बाद भगवान राम ने लंका पर विजय प्राप्त हुई थी। श्री दुर्गा का प्रथम रूप श्री शैलपुत्री हैं। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण ये शैलपुत्री कहलाती हैं। नवरात्र के प्रथम दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। श्री दुर्गा का द्वितीय रूप श्री ब्रह्मचारिणी है। इन्होंने भगवान शंकर को पति रूप से प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। अतः यह तपश्चरिणी और ब्रह्मचारिणी के नाम से विख्यात हैं। श्री दुर्गा का तृतीय रूप श्री चंद्रघंटा है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। नवरात्रि के तीसरे दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती है। श्री दुर्गा का चतुर्थ रूप श्री कूष्मांडा हैं। अपने उदर से ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्मांडा देवी के नाम से पुकारा जाता है। नवरात्रि के चौथे दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। श्री दुर्गा का पंचम रूप श्री स्कंदमाता हैं। श्री स्कंद (कुमार कार्तिकेय) की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। नवरात्रि के पांचवें दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। श्री दुर्गा का षष्ठम् रूप श्री कात्यायनी। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया था। इसलिए वे कात्यायनी कहलाती हैं। नवरात्रि के छठे दिन इनकी पूजा और आराधना होती है। श्रीदुर्गा का सप्तम रूप श्री कालरात्रि हैं। यह काल का नाश करने वाली हैं, इसलिए कालरात्रि कहलाती हैं। नवरात्रि के सातवें दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती है। श्री दुर्गा का अष्टम रूप श्री महागौरी हैं। इनका वर्ण पूरी तरह गौर है, इसलिए यह महागौरी कहलाती हैं। नवरात्रि के आठवें दिन इनका पूजन किया जाता है। श्री दुर्गा का नवम् रूप श्री सिद्धिदात्री हैं। यह सब प्रकार की सिद्धियों की दाता हैं, इसीलिए यह सिद्धिदात्री कहलाती हैं। नवरात्रि के नौवें दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। उत्तर भारत में मंदिरों में मां भगवती का पूरे श्रृंगार के साथ पूजन किया जाता है वहीं गुजरात और महाराष्ट्र में गरबा का आयोजन किया जाता है। शारदीय नवरात्रि के दौरान पूरा बंगाल दुर्गामय हो जाता है। मां के मंदिरों विशेष रूप से जम्मू के कटरा स्थित माता वैष्णों देवी में तो नवरात्र में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।
और ख़बरें >

समाचार

MAHA MEDIA NEWS SERVICES

Sarnath Complex 3rd Floor,
Front of Board Office, Shivaji Nagar, Bhopal
Madhya Pradesh, India

+91 755 4097200-16
Fax : +91 755 4000634

mmns.india@gmail.com
mmns.india@yahoo.in