महामीडिया न्यूज सर्विस
जब धरा पर अधर्म फैलता है भगवान को अवतार लेना पड़ता है

जब धरा पर अधर्म फैलता है भगवान को अवतार लेना पड़ता है

admin | पोस्ट किया गया 66 दिन 22 घंटे पूर्व
11/10/2018
भोपाल (महामीडिया), आज श्री गुरूदेव स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती आश्रम, छान में श्री सहस्रचण्डी महायज्ञ प्रातः 08:00 बजे प्रारम्भ हुआ। आज यज्ञ का द्वितीय दिवस था जिसमें 100 वैदिक पण्डितों के मंत्रोच्चार के बीच पूजन, श्रीचण्डी पाठ किया गया। शारदीय नवरात्र के पावन पर्व पर परम पूज्य महर्षि महेश योगी जी की दिव्य प्रेरणा से श्रीसहस्रचण्डी महायज्ञ एवं श्रीराम कथा अमृत प्रवाह का आयोजन स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती आश्रम, छान में हो रहा है श्रीराम कथा अमृत प्रवाह प्रारम्भ होने के पूर्व महर्षि विद्या मन्दिर समूह के चेयरमैंन ब्रह्मचारी गिरीश ने सर्वप्रथम गुरूपूजन एवं व्यास गद्दी की पूजा अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
राम कथा का अमृत ज्ञान प्रदान करते हुए हरिद्वार से पधारे सुप्रसिद्ध कथाव्यास अनन्त श्री विभूषित महामण्डलेश्वर स्वामी अर्जुन पुरी महाराज ने कहा कि नवरात्र के पावन पर्व पर दिव्य प्रभाव विद्यमान है भगवान अपने अवतार का कारण बताते हुए कहते हैं जब-जब धरा पर धर्म की हानि होती है अर्थात् अधर्म फैलता है तब-तब भगवान को धरा पर अवतार लेना होता है। जीवन में पावर, सत्ता, शक्ति मिलना कठिन है किन्तु इन सबके बीच भौतिक संतुलन आवश्यक है। गौ में हमारे 33 करोड़ देवी देवताओं का वास होता है इसीलिए हमारे धर्म ग्रंथों में गौ की पूजा का विशिष्ट स्थान है। शिवजी की कथा सुनते-सुनते माता पर्वती को भी नींद आ जाती है फिर तो आम श्रोता का कहना ही क्या। दिव्य श्रोता और आम श्रोता का यही अन्तर जो राम कथा के श्रवण में परिलक्षित होता है अर्थात् कई लोग इसका मनन कर लेते हैं और कई लोग केवल श्रवण कर पाते हैं। जिस कृष्ण से सारा ब्रह्माण्ड डरता है वह अपनी माता स्वयं यशोदा से डरता है और कहता है कि मइया मैं नहीं माखन खायो अर्थात् प्रभु की लीला यह बताती है कि भगवान का अवतार मानवीय प्रसंगों से ओत-प्रोत है यहीं मानवीय मूल्य हमें रामकथा में हर जगह परिलक्षित होते हैं। मालिक को कैसा होना चाहिए जो प्रजा को पाल पोश सके और उसका ध्यान रख सके ऐसे ही राजा का चरित्र भगवान श्रीराम में सामने आता है।
इस नवदिवशीय श्री सहस्रचण्डी महायज्ञ एवं श्रीराम कथा अमृत प्रवाह का आयोजन महर्षि वेद विज्ञान विद्यापीठ, महर्षि विद्या मन्दिर विद्यालय समूह एवं महर्षि विश्व शाँति आन्दोलन द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। प्रतिदिन प्रातः 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक पूजन, श्रीचण्डी पाठ एवं हवन का कार्यक्रम निर्धारित है दोपहर 3 से सायं 6 बजे तक श्रीराम कथा अमृत प्रवाह का आयोजन हो रहा है। महर्षि समूह के विभिन्न संस्थानों के अधिकारी, कर्मचारी एवं समाज के विशिष्ट नागरिक इस अवसर पर बड़ी संख्या में उपस्थित थे।


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