महामीडिया न्यूज सर्विस
विश्व में स्थाई शाँति के लिए श्रीराम कथा का सप्तम दिवस

विश्व में स्थाई शाँति के लिए श्रीराम कथा का सप्तम दिवस

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 30 दिन 19 घंटे पूर्व
16/10/2018
भोपाल (महामीडिया) साधना और भक्ति से दैवीय शक्ति की आराधना मानवीय चेतना का अद्वितीय दिव्य गुण, स्वभाव और धर्म है। हम सहज ही उन परम सत्ता की निकटता का सदा अनुभव करें, उनके आशीष में हम हरपल, प्रतिपल रहें यही मनोकामना शक्ति की आराधना है। विश्वव्यापी स्थाई शान्ति, विश्व जनमानस के लिए अनन्त समृद्धि, अखण्डता और आपसी सौहार्द के निमित्त भक्त भावुक मन शारदीय नवरात्र के पावन पर्व पर परम पूज्य महर्षि महेश योगी जी की दिव्य प्रेरणा एवं उनके परम शिष्य ब्रह्मचारी गिरीश के सानिध्य में श्री सहस्रचण्डी महायज्ञ एवं श्रीराम कथा अमृत प्रवाह का आयोजन छान के स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती आश्रम में हो रहा है। आज सहस्रचण्डी महायज्ञ एवं श्रीराम कथा अमृत प्रवाह का सप्तम दिवस था। जो प्रातः 8 बजे से लेकर 12 बजे तक 121 वैदिक पण्डितों के मंत्रोच्चार के बीच सम्पन्न हुआ।
श्रीराम कथा का अमृत प्रवाहित करते हुए हरिद्वार से पधारे कथाव्यास अनन्त श्री विभूषित महामण्डलेश्वर स्वामी अर्जुन पुरी महाराज ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज हनुमान जी का स्मरण करते हुए कहा कि वानरों को हनुमान जी उस स्थल को दिखाया जहाँ शीतल जल उपलब्ध था। प्रश्न था समुद्र सैकड़ों मील दूर है सब वहाँ कैसे पहुँचेंगे। तभी हनुमान जी ने कहा कि सभी अपनी-अपनी आँखें मूँद लें और सभी वानरों ऐसा ही किया जब सभी आँखे खोली तो देखा कि वह कोशों मील की यात्रा जंगल और पहाड़ों को पार कर चुके हैं सभी वानरों में से किसी एक के मुह में जटायु का नाम निकल गया तभी वहाँ वानरों के बीच उपस्थित जटायु के भाई ने उत्सुकता से अपने भाई के बारे में जानना चाहा तब अंगद ने कहा कि मैं वहाँ तक चला तो जाऊँगा किन्तु लौट पाऊँगा अथवा नहीं इसमें संसय है। गुरूजी ने अंगद को श्राप दे रखा था कि यदि उसे एक मुक्का भी मार दिया तो वह समाप्त हो जायेगा। जब सारे बानर बीर अपने-अपने बल और सौर्य पर विचार कर रहे थे तब हनुमान जी शाँत बैठे हुए थे। जामवंत ने जाकर उन्हें झकझोरा तब कहीं उनकी ध्यान की मुद्रा टूटी। हनुमान जी को भी एक ऋषि ने श्राप दे रखा था कि जब तक उनको कोई उनकी शक्ति याद नहीं दिलायेगा तब तक उन्हें अपने बल का एहसास नहीं होगा। इसी श्राम की वजह से हनुमान जी को उनकी शक्ति याद दिलानी पड़ती है यही शक्ति उन्हें लंका पहुँचने के पूर्व याद दिलाई गई थी जिससे वह पहाड़ों, पर्वत और समुद्र को लांघ कर लंका पर विजय दिला सके। 
10 अक्टूबर से प्रारम्भ होकर 9 दिवस तक चलने वाली इस सहस्रचण्डी महायज्ञ एवं श्रीराम कथा अमृत प्रवाह का आयोजन महर्षि वेद विज्ञान विद्यापीठ, महर्षि विद्या मन्दिर समूह एवं महर्षि विश्व शाँति आन्दोलन द्वारा किया जा रहा है। जिसमें प्रतिदिन प्रातः 8 बजे से लेकर 12 बजे तक श्रीसहस्रचण्डी पाठ एवं दोपहर 3 बजे से सायं 6 बजे तक श्रीराम कथा अमृत प्रवाह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शमिल हो रहे हैं। आज के कार्यक्रम में महर्षि समूह के विभिन्न संस्थानों के अधिकारी कर्मचारी सहित समाज के विशिष्ट नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहकर श्रीराम अमृत कथा का रसपान किया एवं प्रतिदिन होने वाली आरती में हिस्सा लिया। शारदीय नवरात्र के चलते महर्षि उत्सव भवन में माँ दुर्गा की आकर्षक झाँकी रखी गई है जिसका आशीर्वाद श्रद्धालु प्रतिदिन प्राप्त कर रहे हैं एवं प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। 

और ख़बरें >

समाचार