महामीडिया न्यूज सर्विस
समस्त इच्छाओं की पूर्णता यज्ञ की साधना से होती है

समस्त इच्छाओं की पूर्णता यज्ञ की साधना से होती है

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 29 दिन 19 घंटे पूर्व
17/10/2018
भोपाल (महामीडिया) समस्त इच्छाओं की पूर्णता, यज्ञ की साधना से होती है यही अनुष्ठान लोक में उपवास अर्थात् देवताओं के पास रहने के सात्विक प्रकल्प के रूप में जाना जाता है। सत्व-रज-तम मिश्रित यह जगत दैव-दैवी अराधना एवं तपस्या द्वारा साध्य है। इसी लिए शारदीय नवरात्र के पावन पर्व पर पूज्य महर्षि महेश योगी जी की दिव्य प्रेरणा एवं उनके परम शिष्य ब्रह्मचारी गिरीश की सानिध्य में श्रीसहस्रचण्डी महायज्ञ एवं श्रीराम कथा अमृत प्रवाह का आयोजन छान के स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती आश्रम में हो रहा है। आज सहस्रचण्डी महायज्ञ एवं श्रीराम कथा अमृत प्रवाह का सप्तम दिवस था। जो प्रातः 8 बजे से लेकर 12 बजे तक 121 वैदिक पण्डितों के मंत्रोच्चार के बीच सम्पन्न हुआ।
श्रीराम कथा का अमृत प्रवाहित करते हुए हरिद्वार से पधारे कथाव्यास अनन्त श्री विभूषित महामण्डलेश्वर स्वामी अर्जुन पुरी महाराज ने कहा कि महर्षि संस्थान द्वारा निरन्तर पूरे विश्व में सनातन धर्म की सेवा हो रही है जिसमें मैं भी शामिल हुँ। ब्रह्मचारी गिरीश जी के नेतृत्व में निरन्तर महर्षि संस्थान प्रगति करे इसके लिए केवल 2 शब्द हैं उन्नति और अवनति उत्थान और पतन। यह संस्थान निरन्तर उन्नति और उत्त्थान के मार्ग पर चल रहा है। प्रत्येक समाज, पिता, माता, बच्चे के सदैव यही शिक्षा देते हैं कि अच्छे बनो, ईमानदार बनो, बड़े होकर प्रगति करो। जिसको अच्छी संगति मिल गई तो उसका जीवन सुधर जाता है। अर्थात् बुरा से बुरा व्यक्ति भी अच्छी संगति के चलते अपना जीवन सुधार लेता है। महान से महान तत्ववेत्ता भी यदि कुसंगति में पड़ जाये तो उसका जीवन भी बिगड़ जाता है। ब्रह्म को गोंद में खिलाने वाली एवं दुग्धपान कराने वाली माता अर्थात् दशरथ की पत्नी को कुसंगति के कारण ही यह फल भोगना पड़ा। भगवान राम जो चाहते हैं वही होता है। इसमें केवल दाशी मंथरा का क्या दोष। लेकिन मंथरा की कुसंगति के कारण वह सबकुछ हुआ जिसे अच्छा नहीं कहा जाता माना की भगवान राम ने स्वयं वनवास चाहा किन्तु मंथरा एवं कैकई के ऊपर यह आरोप लगे और उन्हें दोषी माना गया।
10 अक्टूबर से प्रारम्भ होकर 9 दिवस तक चलने वाली इस सहस्रचण्डी महायज्ञ एवं श्रीराम कथा अमृत प्रवाह का आयोजन महर्षि वेद विज्ञान विद्यापीठ, महर्षि विद्या मन्दिर समूह एवं महर्षि विश्व शाँति आन्दोलन द्वारा किया जा रहा है। जिसमें प्रतिदिन प्रातः 8 बजे से लेकर 12 बजे तक श्रीसहस्रचण्डी पाठ एवं दोपहर 3 बजे से सायं 6 बजे तक श्रीराम कथा अमृत प्रवाह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शमिल हो रहे हैं। आज के कार्यक्रम में महर्षि समूह के विभिन्न संस्थानों के अधिकारी कर्मचारी सहित समाज के विशिष्ट नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहकर श्रीराम अमृत कथा का रसपान किया एवं प्रतिदिन होने वाली आरती में हिस्सा लिया। शारदीय नवरात्र के चलते महर्षि उत्सव भवन में माँ दुर्गा की आकर्षक झाँकी रखी गई है जिसका आशीर्वाद श्रद्धालु प्रतिदिन प्राप्त कर रहे हैं एवं प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। 

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