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देवउठनी एकादशी से शुरू होते हैं मांगलिक कार्य

देवउठनी एकादशी से शुरू होते हैं मांगलिक कार्य

admin | पोस्ट किया गया 90 दिन 9 घंटे पूर्व
18/11/2018
नई दिल्ली (महामीडिया) देवउठनी एकादशी देवोत्थान एकादशी के नाम से भी प्रसिद्ध है। देवउठनी एकादशी से ही सारे शुभ कार्य जैसे, विवाह, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य होने शुरू होते हैं। इस दिन शलिग्राम से तुलसी विवाह भी किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से एक हजार अश्वमेध यज्ञ करने जितना फल प्राप्त होता है। ऐसी मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति की बेटी नहीं है, वह यदि इस दिन तुलसी विवाह करता है तो उसे कन्या दान करने का पुण्य प्राप्त होता है। प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर आंगन में चौक बनाना चाहिए। उसके बाद भगवान विष्णु के चरणों को अल्पना से बनाएं। देवउठनी एकादशी की रात में सुभाषित स्त्रोत का पाठ, भगवत कथा और पुराणादि का पाठ करना चाहिए। 'उत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पतये। त्वयि सुप्ते जगन्नाथ जगत्‌ सुप्तं भवेदिदम्‌॥ उत्थिते चेष्टते सर्वमुत्तिष्ठोत्तिष्ठ माधव। गतामेघा वियच्चैव निर्मलं निर्मलादिशः॥ शारदानि च पुष्पाणि गृहाण मम केशव।' मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। इसके बाद विधिवत पूजा करना चाहिए। भगवान के मन्दिर और सिंहासन पुष्प और वंदनबार आदि से चाहिए। आंगन में देवोत्थान का चित्र बनाएं और फिर फल, पकवान, सिंघाड़े, गन्ने आदि चढ़ाकर डलिया से ढक दें और दीपक जलाएं। श्रद्धापूर्वक पूजन कर धूप-दीप जलाकर आरती करना चाहिए। 
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