महामीडिया न्यूज सर्विस
हिंदू धर्म में मोक्षदा एकादशी का बहुत महत्व है

हिंदू धर्म में मोक्षदा एकादशी का बहुत महत्व है

admin | पोस्ट किया गया 64 दिन 9 घंटे पूर्व
14/12/2018
भोपाल (महामीडिया) हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियाँ होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। मार्गशीर्ष मास के शुक्लपक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है। इस बार मोक्षदा एकादशी 18 दिसंबर को है। ऐसी पौराणिक मान्‍यता है कि मोक्षदा एकादशी का व्रत करने से मनुष्‍यों के सभी पाप नष्‍ट हो जाते हैं।  इस व्रत के प्रभाव से पितरों को भी मुक्ति मिलती है। माना जाता है कि यह व्रत मनुष्‍य के मृतक पूर्वजों के लिए स्‍वर्ग के द्वार खोलने में मदद करता है। शास्त्रों में ऐसी मान्यता है कि जो भी व्‍यक्ति मोक्ष पाने की इच्‍छा रखता है उसे इस एकादशी पर व्रत रखना चाहिए। इसी दिन भगवान श्रीकृष्‍ण के मुख से पवित्र श्रीमदभगवद् गीता का जन्‍म हुआ था इसलिए इस दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है। मोक्षदा एकादशी के दिन भगवत गीता की पूजा करके आरती करनी चाहिए, इसके पश्चात गीता का पाठ करना चाहिए। इससे महापुण्य की प्राप्त होती है। मोक्षदा एकादशी  को दक्षिण भारत में वैकुण्ठ एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने महाभारत के प्रारम्भ होने से पूर्व अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। विष्‍णु पुराण के अनुसार मोक्षदा एकादशी का व्रत हिंदू वर्ष की अन्‍य 23 एकादश‍ियों पर उपवास रखने के बराबर है।  इस दिन तुलसी की मंजरी, धूप-दीप आदि से भगवान दामोदर का पूजन करना चाहिए। पूजा पाठ करने के बाद व्रत-कथा सुननी चाहिए। व्रत एकदाशी के अलग दिन सूर्योदय के बाद खोलना चाहिए।
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