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निष्कपट होकर ही राम को पाया जा सकता हैं: शास्त्री जी

निष्कपट होकर ही राम को पाया जा सकता हैं: शास्त्री जी

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 15 दिन 10 घंटे पूर्व
09/04/2019
भोपाल (महामीडिया) महर्षि महेश योगी संस्थान में चल रहे चैत्र नवरात्र महोत्सव के अर्न्तगत श्रीराम कथा प्रवाह का वाचन प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित चतुर नारायण शास्त्री के मुखारबिंद द्वारा किया जा रहा है। कथा के तृतीय दिवस पर शास्त्री जी ने कथा शुरू करने से पहले श्रोताओ को राम भक्ति में रमाने के लिए ?जय राम? के घोष से संगीतमय वातावरण बनाया। कल शास्त्री जी ने प्रभु राम के परिवार की महिमा का वर्णन किया था। महाराज जी ने कल के कथा क्रम को याद कराते हुए कहा की राम जी का पूरा परिवार ऐसा हैं कि उनके हर एक सदस्य के बारे में अगर बताना चाहे तो महीनों भी कम पड़ें। शास्त्री जी ने आगे बताया कि संसार की कोई भी वास्तु आप किसी से भी ले सकते हो पर मति अर्थार्थ बुद्धि आपको कोई नहीं दे सकता। गायत्री मंत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा की बुद्धि को प्रेरित कर उसे भगवन की महिमा में लगाने का काम सीता या गायत्री द्वारा ही किया जा सकता हैं। इसका मतलब ये हुआ की अगर हमें राम जी की कृपा पानी हैं तो हमें सीता जी को प्रसन्न करना होगा। इसी तरह ठाकुर जी को पाने के लिए राधा रानी की शरण में जाना होगा।  
कल की कहानी से आगे बढ़ते हुए शास्त्री जी ने भगवान की राम भक्ति निष्कपट रहित होकर श्रद्धा प्रेम व लगन के साथ प्रभु नाम सुमिरन करना के बारे में भक्तों को बताया। शास्त्री जी ने कहा की सभी लोग हमसे पूछते हैं कि राम जी ने सुरुपनखा का त्याग क्यों किया जबकि श्री कृष्ण ने पूतना का उद्धार किया। इसपर उन्होंने कहा की सुरुपनखा रूप बदलकर श्री राम को रिझाने आयी थी इसीलिए भगवान् को पाना है तो बिना निष-कपट के आये। पूतना के बारे मे कहा जाता हैं कि पूतना, अपने पिछले जन्म मैं बाली की बेटी रतन बाला थी। शाप के कारन उसे पूतना के रूप में जन्म लेना पड़ा। पूतना बाल गोपाल को मारने के उद्देश्य से आयी थी पर उस समय उनके मन में वात्सल्य आ गया था इसीलिए भगवान् द्वारा उसका उद्धार हुआ। कथा पंडाल में महर्षि संस्था के सुप्रसिद्ध कथा वाचक निलिम्प त्रिपाठी ने परिवार सहित अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज करायी। 
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