महामीडिया न्यूज सर्विस
जलियांवाला बाग कांड की वर्षगांठ पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने दी श्रद्धांजलि

जलियांवाला बाग कांड की वर्षगांठ पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने दी श्रद्धांजलि

admin | पोस्ट किया गया 128 दिन 16 घंटे पूर्व
13/04/2019
अमृतसर (महामीडिया) जलियांवाला बाग नरसंहार के सौ वर्ष होने के मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर शहीदों को याद किया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जलियांवाला बाग के शहीदों को याद किया। उन्होंने ट्वीट में लिखा कि '100 वर्ष पहले आज ही के दिन, हमारे प्यारे स्वाधीनता सेनानी जलियांवाला बाग में शहीद हुए थे। वह भीषण नरसंहार सभ्यता पर कलंक है। बलिदान का वह दिन भारत कभी नहीं भूल सकता। उनकी पावन स्मृति में जलियांवाला बाग के अमर बलिदानियों को हमारी श्रद्धांजलि।'' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि उनका बलियादान कभी भुलाया नहीं जा सकता। इनके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पंजाब के मुख्यमंत्री केप्टन अमरिंदर सिंह ने भी जलियांवाला बाग स्मारक स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित की। मालूम हो कि अमृतसर में 1919 में वैशाखी त्योहार के दिन जलियांवाला बाग में स्वतंत्रता की मांग के लिए आयोजित एक रैली में कर्नल डायर के निर्देश पर सैनिकों ने निहत्थे लोगों पर गोलियां चलानी शुरू कर दी थी। इस घटना में सैकड़ों लोग मरे गए थे। " >
अमृतसर (महामीडिया) जलियांवाला बाग नरसंहार के सौ वर्ष होने के मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर शहीदों को याद किया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जलियांवाला बाग के शहीदों को याद किया। उन्होंने ट्वीट में लिखा कि '100 वर्ष पहले आज ही के दिन, हमारे प्यारे स्वाधीनता सेनानी जलियांवाला बाग में शहीद हुए थे। वह भीषण नरसंहार सभ्यता पर कलंक है। बलिदान का वह दिन भारत कभी नहीं भूल सकता। उनकी पावन स्मृति में जलियांवाला बाग के अमर बलिदानियों को हमारी श्रद्धांजलि।'' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि उनका बलियादान कभी भुलाया नहीं जा सकता। इनके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पंजाब के मुख्यमंत्री केप्टन अमरिंदर सिंह ने भी जलियांवाला बाग स्मारक स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित की। मालूम हो कि अमृतसर में 1919 में वैशाखी त्योहार के दिन जलियांवाला बाग में स्वतंत्रता की मांग के लिए आयोजित एक रैली में कर्नल डायर के निर्देश पर सैनिकों ने निहत्थे लोगों पर गोलियां चलानी शुरू कर दी थी। इस घटना में सैकड़ों लोग मरे गए थे। 
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