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वैशाख मास में की जाती है भगवान विष्णु की पूजा

वैशाख मास में की जाती है भगवान विष्णु की पूजा

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 29 दिन 6 घंटे पूर्व
20/04/2019
भोपाल (महामीडिया) आज से वैशाख मास शुरू हो रहा है। हिन्दू धर्म में वैशाख मास का बहुत महत्व है। आज से शुरू होकर वैशाख मास की पूर्णिमा तक यम-नियम आदि चलेंगे। माना जाता है कि वैशाख मास की पूर्णिमा को ही ब्रह्मा जी ने काले और सफेद तिल उत्पन्न किये थे, जिसके उपलक्ष्य में वैशाख पूर्णिमा को तिल युक्त जल से स्नान करने, अग्नि में तिलों की आहुति देने और तिल तथा मधु, यानी शहद का दान करने का विधान है। इस दिन ये सब कार्य करने से व्यक्ति के जीवन में खुशियां ही खुशियां आती हैं और आस-पास सब लोगों के साथ प्रेम भाव बना रहता है। वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस बार वैशाख मास की पूर्णिमा 18 मई को है।
वैशाख मास के दौरान भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। इस दौरान भगवान विष्णु की माधव नाम से पूजा की जाती है। जानकारी के लिये बता दें कि वैशाख मास का एक नाम माधव मास भी है। स्कन्द पुराण के वैष्णव खण्ड में भी आया है-
न माधवसमो मासो न कृतेन युगं समम्।
न च वेदसमं शास्त्रं न तीर्थं गंगया समम्।।   
माधवमास, यानी वैशाख मास के समान कोई मास नहीं है, सतयुग के समान कोई युग नहीं है, वेदों के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगाजी के समान कोई तीर्थ नहीं है। अतः माधव मास का बड़ा ही महत्व है। वैशाख मास के दौरान पूरे 30 दिनों तक तुलसी की पत्तियों से भगवान विष्णु का पूजन किया जाना चाहिए। इससे व्यक्ति को अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त होता है। इसके अलावा उस व्यक्ति के घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। वैशाख या माधवमास के दौरान जप, तप, हवन के अलावा स्नान और दान का भी विशेष महत्व है। इस दौरान जो व्यक्ति श्रद्धाभाव से जप, तप, हवन, स्नान, दान आदि शुभकार्य करता है, उसका अक्षयफल उस व्यक्ति को प्राप्त होता है। 

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