महामीडिया न्यूज सर्विस
आज कालाष्टमी है

आज कालाष्टमी है

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 120 दिन 4 घंटे पूर्व
26/04/2019
भोपाल (महामीडिया) काशी के कोतवाल कहे जाने वाले भगवान भैरव की पूजा की पावन तिथि यानी कालाष्टमी आज है। प्रत्येक माह के कृष्णपक्ष की अष्टमी को कालाष्टमी की तिथि पर भगवान भैरव की विशेष रूप से साधना आराधना की जाती है। तंत्र-मंत्र के साधकों के अनुसार भगवान भैरव को परम शक्तिशाली रुद्र बताया गया है। इन्हें देवाधिदेव भगवान शिव का अवतार माना गया है। 
कालभैरव के जन्म को लेकर पुराणों में बड़ी ही रोचक कथा है। शिव पुराण के अनुसार एक बार ब्रह्मा जी और विष्णु जी में कौन सर्वश्रेष्ठ है इस बात को लेकर वाद-विवाद पैदा हो गया। तब दोनों ने अपने आपको श्रेष्ठ बताया और आपस में एक दूसरे से युद्ध करने लगे। इसके बाद सभी देवताओं ने वेद से पूछा तो उत्तर आया कि जिनके भीतर चराचर जगत, भूत, भविष्य और वर्तमान समाया हुआ है भगवान शिव ही सर्वश्रेष्ठ हैं। वेद के द्वारा भगवान शिव की महिमा ब्रह्माजी को पसंद नहीं आई और उन्होंने अपने पांचवें मुख से शिव के बारे में भला-बुरा कहा। इससे वेद अत्यंत दु:खी हुए। उसी समय एक दिव्यज्योति के रूप में भगवान रूद्र प्रकट हुए। तब ब्रह्मा ने कहा कि हे रूद्र तुम मेरे ही सिर से पैदा हुए हो। अधिक रुदन करने के कारण मैंने ही तुम्हारा नाम रूद्र रखा है इसलिए तुम मेरी सेवा में आ जाओ। ब्रह्माजी के इस आचरण पर भगवान शिव को अत्यंत क्रोध आया और उन्होंने उसी क्षण भैरव को प्रकट करते हुए कहा कि तुम ब्रह्मा पर शासन करो। दिव्य शक्ति संपन्न भैरव ने अपने बाएं हाथ की सबसे छोटी अंगुली के नाखून से शिव के प्रति अपमान जनक शब्द कहने वाले ब्रह्मा जी के पांचवें सिर को ही काट दिया। इस पूरे प्रकरण के बाद भगवान शिव के कहने पर भैरव जी काशी को कर गए, जहां उन्हें ब्रह्म हत्या से मुक्ति मिली। रूद्र ने इन्हें काशी का कोतवाल नियुक्ति किया। आज भी वाराणसी में भगवान भैरव काशी के कोतवाल के रूप में पूजे जाते हैं। जिनका दर्शन किये बगैर बाबा विश्वनाथ का दर्शन अधूरा रहता है।
कालष्टमी के दिन भगवान भैरव के साथ मां दुर्गा की पूजा अवश्य करना चाहिए। विदित हो कि देश के तमाम शक्तिपीठ और सिद्धपीठ में देवी दर्शन के बाद भगवान भैरव के दर्शन किए जाते हैं। जो शिव एवं शक्ति का साधक भगवान भैरव की प्रतिदिन साधना-आराधना करता है, उसके लाखों जन्मों में किए हुए पाप नष्ट हो जाते हैं। शास्त्रों में काल भैरव का वाहन कुत्ता बताया गया है। काल भैरव को प्रसन्न करने का सबसे आसान तरीका है कि काले कुत्ते को मीठी रोटी खिलाएं। इस उपाय से कालभैरव के साथ ही साथ शनि देव भी खुश हो जाएंगे। 
कालभैरव शिव के तामसी रूप हैं इसलिए इन्हें प्रसाद स्वरूप मदिरा चढ़ाया जाता है। कहीं कहीं कालभैरव को दूध चढ़ाने का भी विधान है। जो लोग मदिरा का सेवन नहीं करते हैं, उन्हें दूध से ही कालभैरव की पूजा करनी चाहिए। कालष्टमी की पूजा-व्रत करने वाले साधक को फलाहार करना चाहिए। 

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