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अलग-अलग नामों से पूरे देशभर में मनाया जाता है मकर संक्रांति का पर्व

अलग-अलग नामों से पूरे देशभर में मनाया जाता है मकर संक्रांति का पर्व

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 32 दिन 14 घंटे पूर्व
15/01/2019
भोपाल (महामीडिया) देश में मकार संक्रांति का पर्व अलग-अलग नामों और अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। जहां उत्तर में संक्रांति की धूम, दक्षिण में पोंगल की मस्ती, पूर्व में बिहू की लचक, तो पश्चिम में पतंगबाजी की होड़ है। यूपी, बिहार में लोग स्नान करने के बाद खिचड़ी बनाते और बांटते हैं। कई लोग दिन में दही-चूड़ा, तिल के पकवान खाते हैं और रात में खिचड़ी बनाते हैं। तमिल समुदाय में पोंगल पर्व में बारिश, सूर्य, खेत और पशु सभी का महत्व होता है। तड़के नए कपड़े पहनकर प्रार्थना की जाती है। इस पर्व का विशेष व्यंजन पोंगल है। बंगाली समुदाय के लोग सुबह जल्दी नहाकर नए या धोए कपड़े पहनकर पकवान बनाने के लिए लोग जुट जाते हैं। नए चावल से तरह-तरह के पीठे बनाए जाते हैं। पाटीशाप्टा, पुली, पायस, दूध पुली, मूंग पुली आदि तरह-तरह के स्वाद और शेप के पीठे बनते हैं। मैथिल समुदाय के लोग इस दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान को तिल अर्पण करते हैं। फिर दही-चूड़ा, तिलकुट खाते हैं। दिन में ही खिचड़ी बनाई जाती है। मारवाड़ी लोग मकर संक्रांति के दिन की शुरुआत भगवान को तिल से बने व्यंजनों का भोग लगाकर करते हैं। रात 12 बजे के बाद से ही मकर संक्रांति की गतिविधियां शुरू हो जाती हैं। माघी बिहू में परंपरा के अनुसार देवता की पूजा करने के बाद तरह-तरह के पकवान बनाते हैं। गुजराती समुदाय संक्रांति के दिन पूजा-पाठ, तिल-गुड़ खाने के अलावा पतंगबाजी करते हैं। लोहड़ी को पंजाबी समुदाय के लोग पौष महीने के अंतिम दिन मनाते हैं। 

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