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अक्षय फल प्रदान करती है 'अक्षय तृतीया'

अक्षय फल प्रदान करती है 'अक्षय तृतीया'

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 170 दिन 4 घंटे पूर्व
06/05/2019
भोपाल (महामीडिया) वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि अक्षय तृतीया या आखा तीज को कहते हैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं उनका अक्षय फल मिलता है। इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है। अक्षय तृतीया को ही भगवान परशुराम का जन्मदिन भी मानते हैं इसीलिए इसे परशुराम तीज भी कहा जाता है। मान्‍यता है कि इस दिन विवाह करने वालों का सौभाग्य अखंड रहता है। इस दिन महालक्ष्मी की प्रसन्नता के लिए विशेष पूजा पाठ करने का विधान है। कहते हैं इस दिन देवी लक्ष्मी के प्रसन्न होने पर धन-धान्य की प्राप्‍ति होती है। और अक्षय तृतीया का अत्‍यंत महात्‍म्‍य मानते हुए इसे अक्षय, अक्षुण्ण फल प्रदान करने वाला दिन कहा जाता है। स्कंद पुराण और भविष्य पुराण में उल्लेख है कि वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को माता रेणुका के गर्भ से भगवान विष्णु ने परशुराम रूप में जन्म लिया। कोंकण और चिप्लून के परशुराम मंदिरों में इस तिथि को परशुराम जयंती बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। इस दिन परशुराम जी की पूजा करके उन्हें अर्घ्य देने का बड़ा माहात्म्य माना गया है। सौभाग्यवती स्त्रियां और क्वारी कन्यायें इस दिन गौरी-पूजा करके मिठाई, फल और भीगे हुए चने बाँटती हैं। गौरी-पार्वती की पूजा करके धातु या मिट्टी के कलश में जल, फल, फूल, तिल, अन्न आदि लेकर दान करती हैं।
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