महामीडिया न्यूज सर्विस
RBI के अधिकार बढ़ा सकती है सरकार

RBI के अधिकार बढ़ा सकती है सरकार

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 32 दिन 23 घंटे पूर्व
18/05/2019
नई दिल्ली  (महामीडिया) सरकार ऋण शोधन अक्षमता और दिवाला संहिता  के तहत बैंकों की दबाव वाली संपत्ति यानी फंसे कर्ज से निपटने को लेकर आरबीआई  को पर्याप्त रूप से सशक्त बनाने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश को देखते हुए सरकार यह कदम उठा रही है. अपने आदेश में शीर्ष अदालत ने केंद्रीय बैंक के 12 फरवरी 2018 के परिपत्र को खारिज कर दिया है. सूत्रों ने कहा कि दबाव वाली संपत्ति पर जारी 12 फरवरी का परिपत्र से एनपीए से निपटने के संदर्भ में बैंकों के बीच अनुशासन आया है और अपनी समझ के हिसाब से कार्य करने की जो स्वतंत्रता थी, वह समाप्त हो गयी है.उसने कहा कि लेकिन परिपत्र थोड़ा सख्त था और हर क्षेत्र इसका हिस्सा था. परिपत्र की संसदीय समिति समेत कई पक्षों ने काफी आलोचना की. पिछले महीने उच्चतम न्यायालय ने परिपत्र को रद्द कर दिया और इसे गैर-कानूनी करार दिया. शीर्ष अदालत के आदेश के बाद कर्ज लौटाने में चूक की स्थिति में आईबीसी के तहत मामले को हर हाल में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण  को भेजने की व्यवस्था अब उपलब्ध नहीं है.हालांकि बैंकिंग नियमन कानून की धारा 35 एए के तहत आरबीआई सरकार के साथ विचार-विमर्श के बाद किसी भी बैंक से फंसे कर्ज के मामले को एनसीएलटी को भेजने के लिये कह सकता है. सूत्रों के अनुसार फंसे कर्ज से निपटने के लिये संतुलित रुख की जरूरत है. इसे बैंकों के विवेक पर नहीं छोड़ा जा सकता, कुछ नियामकीय निगरानी होनी चाहिए. उसने कहा कि नियामकीय रूपरेखा को मजबूत करने और एनपीए से निपटने के मामले में बैंकों को अपने विवेकाधिकार की अनुमति नहीं देने को ध्यान में रखकर बैंक नियमन कानून पर गौर किया जा रहा है.

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