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मोदी की आंधी मे कई दिग्गज उड़े

मोदी की आंधी मे कई दिग्गज उड़े

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 31 दिन 16 घंटे पूर्व
24/05/2019
नई दिल्ली  (महामीडिया) लोकसभा चुनाव में भाजपा को ऐतिहासिक सफलता मिली है और पार्टी ने पहली बार अपने बूते पर 300 का आंकड़ा पार कर लिया है। मोदी लहर के आगे बढ़े-बढ़े दिग्गज धराशायी हो गए। देश की सबसे पुरानी पार्टी के 9 पूर्व मुख्यमंत्री इस मोदी लहर में अपनी सीट नहीं बचा सके। तो आईए जानते हैं वो 9 पूर्व मुख्यमंत्री जो लोकसभा चुनाव 2019 में जीत दर्ज नहीं कर सकेभूपेंद्र हुड्डा- कांग्रेस के दिग्गज नेता और 4 बार सासंद, 2 बार (10 साल) हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा हरियाणा के सोनीपत से चुनाव लड़े थे लेकिन भाजपा उम्मीदवार रमेश कौशिक के आगे खुद की सीट नहीं बचा सके। रमेश कौशिक ने हुड्डा को 164864 मतों से करारी शिकस्त दी। 
हरीश रावत- उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के महासचिव हरीश रावत भी अपनी सीट नहीं बचा सके। हरीश रावत विधानसभा चुनाव में भी 2 सीटों से चुनाव लड़े थे लेकिन दोनों सीटों पर वो हार गए। 2014 में हरिद्वार से चुनाव हारने वाले रावत को इस बार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने 3,39,096 मतों से शिकस्त दी।
अशोक चौहान- महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौहान नांदेड से इस बार अपनी सीट नहीं बचा सके। चौहान को भाजपा के प्रतापराव पाटिल ने 40148 वोटों से शिकस्त दी।
शीला दीक्षित- कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष और 15 साल तक दिल्ली पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को भी हार का सामना करना पड़ा। उत्तर पूर्व दिल्ली से चुनाव लड़ रही शीला दीक्षित को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने 366102 मतों से शिकस्त दी।
दिग्विजय सिंह ? 10 साल तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह को इस बार कांग्रेस ने भोपाल सीट से अपना उम्मीदवार बनाया था। सिंह को मालेगांव ब्लास्ट की आरोपी और भाजपा उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने 364822 मतों से हराया था।
सुशील कुमार शिंदे- देश के पूर्व गृहमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री रहे सुशील कुमार शिंदे अपनी पारंपरिक सीट सोलापुर को नहीं बचा सके। शिंदे को भाजपा के जय सिद्धेश्वर शिवारचरी ने 1,58,608 वोटों से हराया।
नबाम तुकी- कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री नबाम तुकी को अरुणाचल पश्चिम सीट से चुनावी मैदान में उतारा था। इस सीट पर भाजपा नेता व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू तुकी के सामने थे। रिजूजू ने 1,54,404 मतों से करारी शिकस्त दी।
मुकुल संगमा-  8 साल तक मेघालय के सीएम रहे मुकुल संगमा को भी इस चुनाव में शिकस्त का सामना करना पड़ा था। उन्हें पूर्व केंद्रीय मंत्री और नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) की आगाथा संगमा ने तौरा सीट से 64030 मतों से हराया।
वीरप्पा मोइली ? यूपीए सरकार के दौरान केंद्र सरकार में अहम मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल चुके कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री वीरप्पा मोइली भी इस चुनाव में अपनी सीट नहीं बचा सके। मोईली अपनी पारंपरिक सीट चिकबल्लपुर से चुनाव लड़े थे और उन्हें भाजपा के बीएन बच्चे गौड़ा ने 1,82,110 वोटों से हराया।

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