महामीडिया न्यूज सर्विस
पत्तल-दोने की परंपरा फिर से शुरू हो

पत्तल-दोने की परंपरा फिर से शुरू हो

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 190 दिन 23 घंटे पूर्व
30/05/2019
भोपाल (महामीडिया) अकसर हम ब्रेंडिड चीजें बिना मोल भाव के लेते हैं। कभी बिना मोलभाव अपनी परंपरा को भी देना चाहिए। हमें भूलना नहीं चाहिए परंपरा, पर्यावरण, पेशा, परिवार, पशुधन का संरक्षण हमारा ही दायित्व है. भारत में सदियों से विभिन्न वनस्पतियों के पत्तों से बने पत्तल संस्कृति का अनिवार्य हिस्सा रहे हैं. ये पत्तल अब भले विदेशों में लोकप्रिय हो रहा है भारत में तो कोई भी सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक उत्सव इनके बिना पूरा नहीं हो सकता था. इन समारोहों में आने वाले अतिथियों को इन पत्तलों पर ही भोजन परोसा जाता था. लेकिन अब ये पत्तल खत्म होने लगी हैं. असंगठित क्षेत्र के पत्तल उद्योग से लाखों मजदूरों की आजीविका जुड़ी है. बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड और राजस्थान जैसे राज्यों में भी अब पत्तों से बने पत्तलों का चलन धीरे-धीरे कम होने लगा है. ग्रामीण इलाकों में तो पत्तलों पर भोजन की परंपरा अब भी कुछ हद तक बरकरार है लेकिन शहरों में इसकी जगह कांच या चीनी मिट्टी की प्लेटों ने ले ली है. विभिन्न समारोहों में बुफे पार्टी का प्रचलन बढ़ने की वजह से भी पत्तों से बने पत्तल अप्रासंगिक होते जा रहे हैं.
भारत में पत्तल बनाने और इस पर भोजन करने की परंपरा कब शुरू हुई, इसका कोई प्रामाणिक इतिहास उपलब्ध नहीं है. लेकिन यह परंपरा सदियों से चली आ रही है. यह जान कर किसी को भी हैरत हो सकती है कि देश में किसी दौर में 20 हजार से ज्यादा किस्म की वनस्पितयों की पत्तियों से पत्तल बनते थे. लेकिन आधुनिकता की बढ़ती होड़ ने इस उद्योग को समेट दिया है. अब खासकर शहरी इलाकों में पत्तल पर भोजन की परंपरा दम तोड़ती जा रही है।
पत्तल पर भोजन के अनगिनत फायदे हैं. जिन पत्तों से पत्तल बनते हैं उनमें अनगिनत औषधीय गुण होते हैं. कहा जाता है कि पलाश के पत्तल में भोजन से सोने के बर्तन में भोजन करने का लाभ मिलता है और केले के पत्तल में भोजन से चांदी के बर्तन में भोजन का लाभ. खून की अशुधद्ता की वजह से होने वाली बीमारियों में पलाश के पत्तल पर भोजन को फायदेमंद माना गया है. पाचन तंत्र संबंधी रोगों में भी इस पत्तल पर भोजन की सलाह दी जाती है. सफेद फूलों वाले पलाश के पत्तों से तैयार पत्तल पर भोजन करने से बवासीर यानी पाइल्स के मरीजों को लाभ होता है. इसी तरह पैरालिसिस या लकवाग्रस्त मरीजों को अमलतास की पत्तियों से तैयार पत्तल में और जोड़ों के दर्द से परेशान मरीजों को करंज की पत्तियों से बनने वाले पत्तल में भोजन की सलाह दी जाती है. पीपल के पत्तल में भोजन मंदबुद्धि बच्चों के इलाज में कारगर साबित होता है.
पत्तलों पर भोजन स्वास्थ्य के लिए तो हितकर है ही, इससे पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचता जबकि प्लास्टिक और थर्माकोल की प्लेट आसानी से नहीं गलती. इससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है. इसके अलावा इन पत्तलों को धोना नहीं पड़ता. इससे पानी व श्रम की बचत होती है. इनको बनाने में किसी किस्म के केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता. इससे स्वास्थ्य को किसी तरह के नकसान का कोई अंदेशा नहीं रहता. इन पत्तलों को इस्तेमाल के बाद किसी जगह गाड़ने पर खाद तैयार हो सकती है.
-नेहा शर्मा 

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