महामीडिया न्यूज सर्विस
आज अचला एकादशी है

आज अचला एकादशी है

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 145 दिन 22 घंटे पूर्व
30/05/2019
भोपाल (महामीडिया) आज अचला एकादशी है। ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अचला एकादशी कहा जाता है। इसे अपरा एकादशी भी कहते हैं। एकादशी में भगवान विष्णु और उनके अवतारों की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन विष्णु के साथ लक्ष्मी और तुलसी की भी पूजा करने की परंपरा है। आज के दिन भगवान विष्णु की धूप-दीप, पुष्प आदि से विधि-पूर्वक पूजा की जाती है। एकादशी की शाम तुलसी के दीपक जलाकर मंत्र जाप करना चाहिए। ध्यान रखें सूर्यास्त के बाद तुलसी को जल नहीं चढ़ाना चाहिए और स्पर्श भी नहीं करना चाहिए। पूजा में तुलसी नामाष्टक मंत्र का जाप करना चाहिए...
मंत्र
वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी। पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।
एतनामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम। य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलभेत।।
पारण के दिन भगवान की दुबारा पूजा, कथा और पाठ करें। कथा समाप्‍त करने के बाद प्रसाद बाटें तथा ब्राह्मण को भोजन खिला कर दक्षिणा देकर भेजना चाहिये। बाद में आप व्रत खोल कर भोजन कर सकते हैं। 
अपरा एकादशी की कथा% 
कहा जाता है कि प्राचीन काल में महीध्वज नामक एक राजा था। उसका छोटा भाई वज्रध्वज बड़ा क्रूर तथा अन्यायी था। उसे अपने बड़े भाई से नफरत थी। उसने क दिन रात में अपने बड़े भाई की हत्‍या करके उसके शरीर को एक पीपल के नीचे गाड़ दिया। इस अकाल मृत्‍यु से राजा प्रेतात्मा बन कर सी पपील पर बस गया और अनेक उत्पात करने लगा। एक दिन धौम्य नामक ॠषि उधर से गुजरे।
उन्होंने प्रेत को महसूस कर लिया और अपने तपोबल से उसके अतीत को जान लिया। ॠषि ने उस प्रेत को पेड़ से उतारा और उसकी प्रेत योनि से मुक्‍ति दिलाने के लिये खुद ही अपरा एकादशी का व्रत किया। इसका जो पुण्‍य मिला उन्‍होंने उस प्रेत को अर्पित कर दिया। इस कारण से राजा की प्रेत योनि से मुक्ति हो गई और वह दिव्य देह धारण कर स्‍वर्ग चला गया। 

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