महामीडिया न्यूज सर्विस
चमकी बुखार से बचने के लिए लक्षणों को देखकर तुरंत इलाज कराएं

चमकी बुखार से बचने के लिए लक्षणों को देखकर तुरंत इलाज कराएं

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 67 दिन 2 घंटे पूर्व
20/06/2019
नई दिल्ली (महामीडिया) चमकी बुखार ने बिहार में हाहाकार मचा रखा है। सरकार और प्रशासन की तमाम कोशिशों के बाद भी इस पर काबू नहीं पाया जा सका है। महामारी की तरह फैली इस बीमारी से कल भी मुजफ्फरपुर में 5 मासूमों की मौत हो गई। बिहार में मरने वाले बच्चों की संख्या 128 पहुंच चुकी है जिसमें अकेले मुजफ्फरपुर में ये आंकड़ा 114 का है। चमकी बुखार से बीमार बच्चों के अस्पतालों में आने का सिलसिला लगातार जारी है। कल 27 बच्चों को भर्ती किया गया।
चमकी बुखार का प्रमुख कारण कुपोषित बच्चों के द्वारा लीची का सेवन माना जा रहा है। ऐसे बच्चे लीची का ज्यादा सेवन करते हैं, इसमें अधपकी लीची का सेवन भी शामिल है। ये बच्चे घर आने के बाद अक्सर बिना खाना खाए ही सो जाते हैं। दरअसल लीची में प्राकृतिक रूप से हाइपोग्लाइसिन ए एवं मिथाइल साइक्लोप्रोपाइल ग्लाइसिन टॉक्सिन पाया जाता है। अधपकी लीची में ये टॉक्सिन अपेक्षाकृत काफी अधिक मात्रा में मौजूद रहते हैं। ये टॉक्सिन शरीर में बीटा ऑक्सीडेशन को रोक देते हैं और रक्त में ग्लूकोज कम हो हो जाता है एवं रक्त में फैटी एसिड्स की मात्रा भी बढ़ जाती है। चूंकि बच्चों के लिवर में ग्लूकोज स्टोरेज कम होता है, जिसकी वजह से पर्याप्त मात्रा में ग्लूकोज रक्त के द्वारा मस्तिष्क में नहीं पहुंच पाता और मस्तिष्क गंभीर रूप से प्रभावित हो जाता है। 
चमकी बुखार के- लक्षण- 
इस बीमारी में शुरुआत में तेज बुखार आता है। इसके बाद बच्चों के शरीर में ऐंठन शुरू हो जाती है। इसके बाद तंत्रिका तंत्रकाम करना बंद कर देता है। इस बीमारी में ब्लड शुगर लो हो जाता है। बच्चे तेज बुखार की वजह से बेहोश हो जाते हैं और उन्हें दौरे भी पड़ने लगते हैं। उनके जबड़े और दांत कड़े हो जाते हैं। बुखार के साथ ही घबराहट भी शुरू होती है और कई बार कोमा में जाने की स्थिति भी बन जाती है। कई मौकों पर ऐसा भी होता है कि अगर बच्चों को चिकोटी काटेंगे तो उसे पता भी नहीं चलेगा। जबकि आम बुखार में ऐसा नहीं होता है। अगर बुखार के पीड़ित को सही वक्त पर इलाज नहीं मिलता है, तो मौत तय है। ज्यादातर बच्चे ही दिमागी बीमारी के शिकार होते हैं। दरअसल, बच्चों में इम्युनिटी कम होती है और वो शरीर के ऊपर पड़ रही धूप को नहीं झेल पाते हैं. यहां तक कि शरीर में पानी की कमी होने पर बच्चे जल्दी हाइपोग्लाइसीमिया के शिकार हो जाते हैं। कई मामलों में बच्चों के शरीर में सोडियम की भी कमी हो जाती है। ज्यादातर बच्चे ही दिमागी बीमारी के शिकार होते हैं। दरअसल, बच्चों में इम्युनिटी कम होती है और वो शरीर के ऊपर पड़ रही धूप को नहीं झेल पाते हैं। यहां तक कि शरीर में पानी की कमी होने पर बच्चे जल्दी हाइपोग्लाइसीमिया के शिकार हो जाते हैं। कई मामलों में बच्चों के शरीर में सोडियम की भी कमी हो जाती है।
ऐसे करें बचाव
बच्चों को रात में अच्छी तरह से खाना खिलाकर सुलाएं। खाना पौष्टिक होना चाहिए। बच्चों को खाली पेट लीची न खाने दें। अधपकी लीची का सेवन कदापि न करने दें। पीड़ित बच्चों को पानी पिलाते रहे, इससे उन्हें हाइड्रेट रहने और बीमारियों से बचने में मदद मिलेगी. इसके अलावा तेज बुखार होने पर पूरे शरीर को ताजे पानी से पोंछें, पंखे से हवा करें या माथे पर गीले कपड़े की पट्टी लगायें ताकि बुखार कम हो सके, बच्‍चे के शरीर से कपड़े हटा लें और उसकी गर्दन सीधी रखें, बच्चों को पैरासिटामॉल की गोली और अन्‍य सीरप डॉक्‍टर की सलाह के बाद ही दें. अगर बच्चे के मुंह से लार या झाग निकल रहा है तो उसे साफ कपड़े से पोंछें, जिससे सांस लेने में उसे दिक्‍कत न हो, बच्‍चों को लगातार ओआरएस का घोल भी पिलाते रहें, तेज रोशनी से बचाने के लिए मरीज की आंख को पट्टी से ढंक दें, बेहोशी या दौरे आने की हालत में मरीज को हवादार जगह पर लिटाएं और चमकी बुखार की स्थिति में मरीज को बाएं या दाएं करवट लिटाकर डॉक्टर के पास ले जाएं।

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