महामीडिया न्यूज सर्विस
डिफाल्टर देश भी बन सकता है पाक

डिफाल्टर देश भी बन सकता है पाक

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 20 घंटे पूर्व
24/06/2019
नई दिल्‍ली (महामीडिया) दुनियाभर में चरमपंथ और आतंकवाद की फंडिंग पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स का कहना है कि पाकिस्तान आतंकी फंडिंग रोकने के लिए दिए निर्देशों का पालन निर्धारित समय (मई, 2019) तक करने में असफल रहा है। यही नहीं संस्था ने पाकिस्तान से यह भी दो टूक कह दिया है कि वह अक्टूबर, 2019 तक आतंकवाद के खिलाफ संतोषजनक कदम नहीं उठाया तो उसे काली सूची में डाल दिया जाएगा यानी उसको प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। एफएटीएफ की यह चेतावनी पाकिस्तान के लिए किसी सदमे से कम नहीं है। एफएटीएफ का अगला कदम पाकिस्‍तान की अर्थव्‍यवस्‍था के लिए ताबूत की आखिरी कील साबित हो सकता है। 
एफएटीएफ ने पाकिस्तान को जून, 2018 में निगरानी सूची (ग्रे लिस्ट) में रखा था। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय संस्था ने पाकिस्तान को निगरानी सूची में ही रखने का फैसला किया है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर यह फैसला भी काफी भारी पड़ने वाला है। कुरैशी ने यहां तक कहा था कि इससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को 10 अरब डॉलर का नुकसान पहुंचेगा।
पाकिस्तान को मनीला स्थित एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) ने 3.4 अरब डॉलर की मदद देने से इनकार कर दिया है। इससे पाकिस्तान की प्रतिष्ठा को चोट पहुंची है। हालांकि, आईएमएफ से उसे 22वें कर्ज के तौर पर राहत मिली है। पाकिस्तान में राजस्व घाटा आसमान छू रहा तो दूसरी ओर भुगतान संतुलन भी बेपटरी है। 2015 में पाकिस्तान का चालू खाता घाटा 2.7 अरब डॉलर था जो 2018 में बढ़कर 18.2 अरब डॉलर के और ऊपर पहुंच गया है। अर्थशास्त्र के जानकारों की मानें तो यदि पाकिस्तान की आर्थिक सेहत में सुधार नहीं आया तो इसके डिफॉल्टर होने का खतरा और बढ़ जाएगा।
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