महामीडिया न्यूज सर्विस
जगन्नाथ यात्रा की देशव्यापी तैयारियां

जगन्नाथ यात्रा की देशव्यापी तैयारियां

admin | पोस्ट किया गया 161 दिन 6 घंटे पूर्व
02/07/2019
भोपाल (महामीडिया) ओडिशा के पुरी में आषाढ़ माह के शुक्लपक्ष के दिन निकाली जाने वाली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। हर बार की तरह पूरे देश में भी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली जायेंगी। यह रथ यात्रा 4 जुलाई को निकाली जायेंगी। इसके लिये जगह-जगह तैयारियों जोरों पर है। पुरी की पवित्र रथ यात्रा को देखने के लिये देश से ही नहीं अपितु विदेशों से भी लाखों श्रद्धालु आते हैं। पुरी का जगन्नाथ मंदिर भारत के चार पवित्र धामों में से एक है। यह मंदिर 800 साल से अधिक पुराना है। जिसमें भगवान श्री कृष्ण जगन्नाथ रूप में विराजित है, साथ ही यहां उनके बड़े भाई बलराम और बहन देवी सुभद्रा की भी पूजा की जाती है। इस दिन महाप्रभु अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होंगे। वे अपनी मौसी के यहां यानि गुण्डीचा मंदिर जाएंगे।
राजधानी भोपाल में भी भगवान जगन्नाथ की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। यहां के श्यामला हिल्स स्थित प्रसिद्ध जगदीश मंदिर से भगवान जगन्नाथ, भाई बालभद्र और सुभद्रा का नगर भ्रमण 4 जुलाई को शुरू होगा। इसके अलावा नगर में ओर भी स्थानों से रथ यात्रा निकाली जायेंगी। 
अयोध्या में भी भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकालने के लिये व्यापक तैयारियां हो चुकी हैं। अयोध्या के दर्जनों मंदिर में इस उत्सव को लेकर धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो चुका हैं और महोत्सव में 4 जुलाई को नगर के मुख्य मार्ग के रास्ते रामघाट तक के लिए रथ यात्रा भी निकाली जाएगी।
पश्चिम बंगाल में रथ यात्रा को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस्कॉन मंदिर में चार जुलाई को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दोपहर एक बजे भगवान जगन्नाथ की रथ की रस्सी खींच कर रथयात्रा का शुभारंभ करेंगी। उसके बाद भगवान जगन्नाथ की आरती की जायेगी। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बशीरहाट से लोकसभा सांसद नुसरत जहां रूही जैन भी अपने पति निखिल जैन के साथ मौजूद रहेंगी।
गुजरात के अहमदाबाद और जगन्नाथ पूरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा को लेकर भव्य तैयारियां की गई हैं। अहमदाबाद में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने साम्प्रदायिक एकता की अनोखी मिसाल पेश की है। यहां रथयात्रा से पहले मुस्लिम समुदाय के लोगों ने जगन्नाथ मंदिर में चांदी का रथ भगवान को अर्पण किया है। यहां सुरक्षा के कड़े इंतजार किये जा रहे हैं।
रथ यात्रा तो पूरे देश में ही निकलती हैं, लेकिन इन सबसे इतर पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा होती है। पुरी में जिस रथ पर भगवान की सवारी चलती है वह विशाल एवं अद्वितीय है। वह 45 फुट ऊंचा, 35 फुट लंबा तथा इतना ही चौड़ाई वाला होता है। इसमें सात फुट व्यास के 16 पहिये होते हैं। इसी तरह बालभद्र जी का रथ 44 फुट ऊंचा, 12 पहियों वाला तथा सुभद्रा जी का रथ 43 फुट ऊंचा होता है। इनके रथ में भी 12 पहिये होते हैं। प्रतिवर्ष नए रथों का निर्माण किया जाता है। बलभद्र जी का रथ तालध्वज और सुभद्रा जी का रथ को देवलन जगन्नाथ जी के रथ से कुछ छोटे हैं। रथयात्रा आरंभ होने से पहले पुराने राजाओं के वंशज पारंपरिक ढंग से सोने के हत्थे वाली झाडू से ठाकुर जी के प्रस्थान मार्ग को साफ करते हैं। इसके बाद मंत्रोच्चार एवं जयघोष के साथ रथयात्रा शुरू होती है। सर्वप्रथम बलभद्र का रथ तालध्वज प्रस्थान करता है। थोड़ी देर बाद सुभद्रा की यात्रा शुरू होती है। अंत में लोग जगन्नाथ जी के रथ को बड़े ही श्रद्धापूर्वक खींचते हैं। लोग मानते हैं कि रथयात्रा में सहयोग से मोक्ष मिलता है, अत: सभी श्रद्धालु कुछ पल के लिए रथ खींचने को आतुर रहते हैं। जगन्नाथ जी की यह रथयात्रा गुंडीचा मंदिर पहुंचकर संपन्न होती है। 'गुंडीचा मंदिर' वहीं पर स्थित है जहां विश्वकर्मा जी ने तीनों देव प्रतिमाओं का निर्माण किया था। यह भगवान की मौसी का घर भी माना जाता है। यहां भगवान एक सप्ताह प्रवास करते हैं और इस दौरान यहीं पर उनकी पूजा की जाती है। आषाढ़ शुक्ल दशमी को जगन्नाथ जी की वापसी यात्रा शुरू होती है। 
भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के दौरान पुरी जाने के लिए के लिए रेलवे 194 ट्रेन चलाएगा। ईस्ट कोस्ट रेलवे के खुर्दा रोड डिवीजन ने यह फैसला लिया। रेलवे के अनुसार, ट्रेनें चार जुलाई से 13 जुलाई तक चलाई जाएंगी। पुरी रेलवे स्टेशन पर 60 नए रेलवे टिकट बुकिंग काउंटर खोले जाएंगे और ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीनें लगाई जाएगी। पुरी रेलवे स्टेशन पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, रेलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में रेलवे सुरक्षा बल, स्निफर डॉग्ज और जवानों को तैनात किया गया है।
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