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जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी आश्चर्य चकित कर देने वाली बातें

जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी आश्चर्य चकित कर देने वाली बातें

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 160 दिन 13 घंटे पूर्व
04/07/2019
भुवनेश्वर (महामीडिया) ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का समारोह शुरू हो गया है। पुरी की पवित्र रथ यात्रा को देखने के लिये देश से ही नहीं अपितु विदेशों से भी लाखों श्रद्धालु पहुंचे हैं। पुरी का जगन्नाथ मंदिर भारत के चार पवित्र धामों में से एक है। यह मंदिर 800 साल से अधिक पुराना है। जिसमें भगवान श्री कृष्ण जगन्नाथ रूप में विराजित है, साथ ही यहां उनके बड़े भाई बलराम और बहन देवी सुभद्रा की भी पूजा की जाती है। आज महाप्रभु अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होंगे। वे अपनी मौसी के यहां यानि गुण्डीचा मंदिर जाएंगे। प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर की कुछ आश्चर्य चकित कर देने वाली बातें हैं इनमें-
- पुरी का जगन्नाथ मंदिर वैष्णव सम्प्रदाय के प्रमुख मंदिरों में से एक है। यह भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण को समर्पित है। भगवान जगन्नाथ इस मंदिर में अपने भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ विराजन हैं।
- गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय के संस्थापक श्री चैतन्य महाप्रभु भगवान जगन्नाथ की नगरी पुरी में कई साल तक रहे थे, इस वजह से इस मंदिर का गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय में खास महत्व है।
- 400,000 वर्ग फुट में फैले इस विशाल मंदिर के शिखर पर चक्र और ध्वज स्थित हैं। इन दोनों का खास महत्व है। चक्र सुदर्शन चक्र का और लाल ध्वज भगवान जगन्नाथ के मंदिर के अंदर विराजमान होने का प्रतीक है। अष्टधातु से निर्मित इस चक्र को नीलचक्र भी कहा जाता है।
- कलिंग शैली में बने इस विशाल मंदिर के निर्माण का कार्य कलिंग राजा अनंतवर्मन चोडगंग देव ने शुरू कराया था। बाद में अनंग भीम देव ने इसे वर्तमान स्वरुप दिया था।
- इस मंदिर के बारे में आश्चर्यचकित कर देने वाली बात यह है कि मंदिर के शीर्ष पर लगा ध्वज हमेशा हवा के विपरीत लहराता है।
- कहा जाता है कि आप जगन्नाथ पुरी में कहीं से भी मंदिर के शीर्ष पर लगे सुदर्शन चक्र को देख सकते हैं।
- इस मंदिर के बारे में यह भी कहा जाता है कि इसके ऊपर से कोई भी पक्षी या विमान नहीं उड़ पाता है।
- मंदिर के आश्यर्चों में एक बात और बताई जाती है कि इसके रसोईघर में चूल्हे पर एक के ऊपर एक 7 बर्तन रखा जाता है। भोजन पहले सबसे ऊपर वाले बर्तन का पकता है।
- बताया जाता है कि इस मंदिर में भक्तों के लिए बनने वाला प्रसाद कभी कम नहीं पड़ता है। मंदिर में वर्ष भर सामान्य मात्रा में ही प्रसाद बनाया जाता है, लेकिन भक्तों की संख्या 1000 हो या एक लाख प्रसाद किसी को कम नहीं पड़ता। मंदिर का कपाट बंद होते ही बचा हुआ प्रसाद खत्म हो जाता है। 
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