महामीडिया न्यूज सर्विस
ब्रीफकेस नहीं इस बार लाल कपड़े में है 'बजट'

ब्रीफकेस नहीं इस बार लाल कपड़े में है 'बजट'

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 46 दिन 5 घंटे पूर्व
05/07/2019
नई दिल्ली (महामीडिया) मोदी सरकार की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कई सालों से चली आ रही ब्रीफकेस में बजट ले जाने की परंपरा को तोड़ दिया है। इस बार वह लाल कपड़े में बजट ले जाते हुये दिखीं। उन्होंने आज ब्रीफकेस में बजट को ले जाने की परंपरा को खत्म कर दिया है। सरकार का मानना है कि यह पाश्चात्य संस्कृति से बाहर आकर देश की पुरानी परंपराओं से जुड़ने की शुरुआत है। बैग का लाल रंग भारतीय परंपराओं के हिसाब से शगुन का प्रतीक है। अब तक बजट पेश करने से पहले वित्त मंत्री एक ब्रीफकेस में ही बजट लेकर संसद पहुंचते थे। 
बता दें कि बजट को पहले फरवरी महीने के आखिरी कारोबारी दिन को पेश किया जाता था। यह 27 या फिर 28 फरवरी होती थी। लेकिन अब इसे फरवरी की पहली तारीख को पेश किया जाता है। इसके अलावा बाजपेयी सरकार के कार्यकाल में बजट पेश करने का समय शाम पांच बजे के बजाए दिन के 11 बजे किया गया था। वहीं रेल बजट आम बजट से एक दिन पहले आता था, लेकिन अब इसे भी केंद्रीय बजट में पूरी तरह से मिला दिया गया है। 
बजट फ्रांसीसी शब्‍द 'बॉगेटी' से निकला हुआ है, जिसका मतलब लेदर बैग होता है। 1860 में ब्रिटेन के 'चांसलर ऑफ दी एक्‍सचेकर चीफ' विलियम एवर्ट ग्‍लैडस्‍टन फाइनेंशियल पेपर्स के बंडल को लेदर बैग में लेकर आए थे। तभी से यह परंपरा निकल पड़ी।
मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति ने कहा है कि यह बहीखाता है, जिसे आज भी कई व्यापारी अपने कारोबार में इस्तेमाल करते हैं। बहीखाता हमारे पुराने जमाने की वर्षों से चली आ रही परंपरा है। देश के पहले वित्त मंत्री आरके चेट्टी ने भी बजट को ब्रीफकेस में ले जाने की परंपरा को शुरू किया था। 

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