महामीडिया न्यूज सर्विस
तमिलनाडु के कांचीपुरम में 'भगवान वरदराजा' के दर्शन हेतु उमड़ा भक्तों का सैलाब

तमिलनाडु के कांचीपुरम में 'भगवान वरदराजा' के दर्शन हेतु उमड़ा भक्तों का सैलाब

admin | पोस्ट किया गया 105 दिन 23 घंटे पूर्व
09/07/2019
चेन्नई (महामीडिया) भारत विविधताओं और परंपराओं का देश है। यहां हर चार कदम पर वाणी और 8 कदम पर रीति रिवाज बदल जाते हैं। भारत में उत्तर से लेकर दक्षिण तक कई मंदिर और धामिक स्थल हैं। हर धार्मिक स्थल की एक अलग परंपरा है। इतनी परंपराओं और विविधता होने के बाद भी भारत एक है। यही सूत्र वाक्य हमें अपनी परंपराओं और लोगों से जोड़े रखता है। भारत के दक्षिण में तमिलनाडु के कांचीपुरम में एक मंदिर स्थित है। इस मंदिर का नाम है भगवान वरदराजा स्वामी मंदिर। यहां भगवान वरदराजा स्वामी की मूर्ति 40 वर्ष में एक बार पवित्र तालाब से बाहर निकालकर भक्तों के दर्शनाथ हेतु रखी जाती है। इस उत्सवी माहौल में हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहते हैं। इस समय यहां देश से ही नहीं विदेशों से भक्तों का हुजुम उमड़ पड़ता है।
 इस बार 3 जुलाई को भगवान की मूर्ति का पवित्र तालाब से बाहर निकाला गया। हजारों श्रद्धालुओं ने उनकी पूजा-अर्चना की। उनके दर्शनार्थ हेतु हजारों की संख्या में भक्त मौजूद थे। इस दौरान मूर्ति को फूल-माला के साथ भव्य यात्रा निकालकर मंदिर के अलग-अलग हिस्सों में ले जाया गया। इसी के साथ ही कांची अति वरदार महोत्सव की शुरूआत हो गई जो कि आगामी 48 दिनों तक चलता रहेगा। 19 अगस्त को भगवान यहां भक्तों को अंतिम दर्शन देने के बाद 20 अगस्त को दोबारा मंदिर के पवित्र तालाब में जल समाधि ले लेंगे। इसके बाद फिर भक्तों का 40 वर्षों तक इंतजार करना पड़ेगा। 
यहां रोजाना लाखों भक्त भगवान के दर्शन के लिये पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं को भगवान अति वरदान के दर्शन में हेतु प्रशासन की ओर से यहां 150 व्हील चेयर और 10 बैट्री कार की व्यवस्था की गई है। भगवान के दर्शन के लिए यहां लोगों को पास जारी किए जा रहे हैं। यहां मुफ्त दर्शन के अलावा 50 से 500 रुपये तक के दर्शन टोकन भी जारी किए जा रहे हैं। इसके तहत लोगों को दर्शन की अलग-अलग सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। 500 रुपये का सबसे महंगा टोकन वीआईपी दर्शन के लिए है। इसके अलावा मंदिर के प्रवेश द्वार पर दो बैगेज स्कैनर लगाए गए हैं। मंदिर की सुरक्षा के लिए 2600 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।
भगवान वरदराजा स्वामी को लेकर कई मान्यताएं हैं इनमें से एक है कि इस मूर्ति को उस समय बनाया गया था, जब मंदिर का जीर्णोद्धार शुरू हुआ था। जीर्णोद्धार कार्य पूरा होने के बाद मूर्ति को पानी में डाल दिया गया था। भगवान अति वरदार की मुर्ति अंजीर के पेड़ की लकड़ी से बनी हुई है।
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