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वाई-फाई के जनक निकोल टेस्ला का आज जन्मदिन

वाई-फाई के जनक निकोल टेस्ला का आज जन्मदिन

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 45 दिन 2 घंटे पूर्व
10/07/2019
भोपाल[ महामीडिया ]  वाई-फाई ने लोगों की जिंदगी को बहुत आसान बना दिया है। इसके जनक अमेरिकी-सर्बियाई आविष्‍कारक निकोल टेस्‍ला का जन्‍म साल 1856 में 10 जुलाई को हुआ था     । 7 जनवरी 1943 को निकोल टेस्ला की 86 साल की उम्र में न्यूयॉर्क में मौत हो गई थी।सर्बो-क्रोएशीयन, चेक, अंग्रेजी, फ़्रेंच, जर्मन, हंगेरीयन, ईटालीयन और लैटीन आठ भाषाओं के जानकार निकोल टेस्‍ला ने वायरलेस कम्‍यूनिकेशन के अलावा एसी करंट, टेस्ला वेव्स, बिजली से चलने वाली मोटर, रोबोटिक्स, रिमोट कंट्रोल, राडार, एक्‍स रे आदि का आविष्‍कार किया। टेस्‍ला ने इलेक्ट्रीसिटी और चुम्बक के क्षेत्रों में कई क्रांतिकारी आविष्‍कार किए थे।उनके बारे में कहा जाता है कि जब वह स्कूल में थे, तो गणित के मुश्किल सवालों को मन में ही हल कर लेते थे। उन्होंने कभी शादी नहीं की, जिसकी वजह यह थी कि उनके काम में कोई खलल नहीं डाले। उन्‍होंने वायरलेस कम्‍युनिकेशन रिमोट कंट्रोल, निओन लाइट, एक्‍स-रे, रडार का आइडिया, अल्‍टरनेटिव करंट, नियाग्रा फॉल पर पहला हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्‍लांट बनाया। उन्होंने साल 1926 में ही स्मार्टफोन बनाने के बारे में सोचा था। अपने पूरे जीवन के दौरान टेस्ला ने एक नियमित कार्यक्रम बनाए रखी। कुछ लोगों का दावा है कि वह रात में केवल दो घंटे ही सोते थे। वह अक्सर न्यूयॉर्क के डेल्मोनिको और बाद में वाल्डोर्फ-एस्टोरिया होटल में एक ही टेबल पर अपना डिनर लेते थे। उन्हें कीटाणुओं से डर लगता था और 18 नैपकिन के का पैक अपने साथ रखते थे। तीन नंबर को लेकर वह ज्यादा ही दीवाने थे। जब वह छोटे थे, तो वह मोती को देखने से भी घबराते थे और इसकी वजह से उन्हें दौरे तक आने लगते थे।टेस्ला ने भाप से चलने वाले इलेक्ट्रिकल जनरेटर इलेक्ट्रो-मैकेनिकल ऑस्किलेटर का विकास किया था, जो अक्षम भाप के इंजनों को बदलने के विकल्प के रूप में देखा जा रहा था। मगर, यह स्टीम टर्बाइन्स के सामने नहीं टिक सका। टेस्ला ने कथित तौर पर दोस्तों को एक कहानी बताई कि वह मैनहट्टन में 46 ईस्ट ह्यूस्टन स्ट्रीट में अपनी प्रयोगशाला में थरथराने वाले ऑस्किलेटर पर काम कर रहे थे।मगर, इसकी प्रतिध्वनि की वजह से पैदा हुए कंपन से कई पड़ोसी इमारतें और जमीन हिलने लगी और पुलिस को फोन किया गया था। जब मशीन ने भवन की अनुनाद आवृत्ति पर कंपन करना शुरू कर दिया, तब टेस्ला को लगा कि वह भूकंप पैदा करने के खतरे में है और कथित तौर पर स्लेजहैमर से मशीन को तोड़ दिया। इस दावे ने मशीन को "टेस्ला की भूकंप मशीन" उपनाम दिया था। हालांकि, बाद में मिथबस्टर्स ने इसे खारिज कर दिया। इस टीम ने टेस्ला की मशीन का फिर से निर्माण कर सैकड़ों फीट दूर से कंपन महसूस करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हुए।टेस्ला का मानना था कि वह अपने काम से पृथ्वी के वातावरण को प्रकाशित कर सकते हैं। उनका मानना था कि अंधेरे को दूर करने और प्रकाश के एक नए युग में लाने की उनमें क्षमता थी। उन्होंने कहा कि पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में गैसें उच्च-आवृत्ति वाले विद्युत धाराओं को ले जाने में सक्षम हैं। वहां ऐसी धाराओं का सफल प्रसारण रात में भी उजाला कर सकता है, जो शिपिंग लेन और हवाई अड्डों को सुरक्षित बनाएगा और पूरे शहरों को रोशन करेगा। मगर, टेस्ला का यह प्रयोग कभी पूरा नहीं हुआ और इसकी संभावना भी अप्रमाणित है।

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