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भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे उत्तम माह है 'सावन'

भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे उत्तम माह है 'सावन'

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 90 दिन 17 घंटे पूर्व
24/07/2019
भोपाल (महामीडिया) हिन्दू परिवारों में सावन माह को बहुत ही पवित्र और महत्वपूर्ण माह माना गया है। भू-लोक वासियों के लिए शिव कृपा पाने का यह उत्तम समय होता है। इस माह के सभी दिन धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत महत्व रखते हैं। इस माह का प्रत्येक दिन एक त्यौहार की तरह मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस माह का प्रत्येक दिन किसी भी देवी-देवता की आराधना करने के लिए सबसे उपयुक्त होता है, विशेष तौर पर इस माह में भगवान शिव, माता पार्वती और श्रीकृष्ण की आराधना की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि जिस तरह इस माह में कीट-पतंगे अपनी सक्रियता बढ़ा देते हैं, उसी तरह मनुष्य को भी पूजा-पाठ में अपनी सक्रियता को बढ़ा देनी चाहिए। यह महीना बारिशों का होता है, जिससे कि पानी का जल स्तर बढ़ जाता है। मूसलाधार बारिश नुकसान पहुंचा सकती है इसलिए शिव पर जल चढ़ाकर उन्हें शांत किया जाता है। शिवपुराण में उल्लेख है कि भगवान शिव स्वयं ही जल हैं। इसलिए जल से उनकी अभिषेक के रूप में अराधना का उत्तमोत्तम फल है, जिसमें कोई संशय नहीं है। सावन महीने में भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसलिए ये समय भक्तों, साधु-संतों सभी के लिए अमूल्य होता है। यह चार महीनों में होने वाला एक वैदिक यज्ञ है, जो एक प्रकार का पौराणिक व्रत है, जिसे 'चौमासा' भी कहा जाता है; तत्पश्चात सृष्टि के संचालन का उत्तरदायित्व भगवान शिव ग्रहण करते हैं। इसलिए सावन के प्रधान देवता भगवान शिव बन जाते हैं।
एक पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले विष का पान करने से भगवान शिव के शरीर का तापमान तेज गति से बढ़ने लगा था। ऐसे में शरीर को शीतल रखने के लिए भोलेनाथ ने चंद्रमा को अपने सिर पर धारण किया और अन्य देव उन पर जल की वर्षा करने लगे। यहां तक कि इन्द्र देव भी यह चाहते थे कि भगवान शिव के शरीर का तापमान कम हो जाए इसलिए उन्होंने अपने तेज से मूसलाधार बारिश कर दी। इस वजह से सावन के महीने में अत्याधिक बारिश होती है, जिससे भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं।
सावन माह में भगवान शिव के भक्त कावड़ ले जाकर गंगा का पानी शिव की प्रतिमा पर अर्पित कर उन्हें प्रसन्न करने का प्रयत्न करते हैं। इसके अलावा सावन माह के प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव पर जल चढ़ाना शुभ और फलदायी माना जाता है।
सावन के महीने में व्रत रखने का भी विशेष महत्व दर्शाया गया है। ऐसी मान्यता है कि कुंवारी लड़कियां अगर इस पूरे महीने व्रत रखती हैं तो उन्हें उनकी पसंद का जीवनसाथी मिलता है। इसके पीछे भी एक कथा मौजूद है जो शिव और पार्वती से जुड़ी है। पिता दक्ष द्वारा अपने पति का अपमान होता देख सती ने आत्मदाह कर लिया था। पार्वती के रूप में सती ने पुनर्जन्म लिया और शिव को अपना बनाने के लिए उन्होंने सावन के सभी सोमवार का व्रत रखा। फलस्वरूप उन्हें भगवान शिव पति रूप में मिले।
सावन के पूरे माह में भरपूर बारिश होती है जिससे कि कीड़े-मकोड़े सक्रिय हो जाते हैं। इसके अलावा इस मौसम में उनका प्रजनन भी अधिक मात्रा में होता है। इसलिए बाहर के खाने का सेवन सही नहीं माना जाता। पशु-पक्षी, जिस माहौल में रहते हैं वहां साफ-सफाई का विशेष ध्यान नहीं रखा जाता, जिससे कि उनके भी संक्रमित होने की संभावना बढ़ती है। इसलिए मांसाहार को वर्जित कहा गया है। आयुर्वेद में भी इस बात का उल्लेख किया गया है कि सावन के महीने में मांस के संक्रमित होने की संभावना बहुत ज्यादा होती है, इसलिए इस पूरे माह मांस-मछली या अन्य मांसाहार के सेवन को निषेध कहा गया है।
सावन के सोमवार को ऐसे करें भगवान शिव की पूजा-
सबसे पहले सुबह स्नान करें और शिव मंदिर जाएं।
मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल अर्पित करें।
घर से नंगे पैर मंदिर जाएं।
मंदिर में खड़ें होकर शिव मंत्र का 108 बार जाप करें।
दिन में सिर्फ फलाहार करें।
शाम के समय भगवान शिव के मंत्रों का फिर जाप करें और उनकी आरती करें।
इन 15 चीजों से करें पूजन-
भगवान शिव की पूजा करते समय भक्‍तों को उनकी पसंद की चीजों का ख्‍याला जरूर रखना चाहिए। सबसे पहले सुबह स्‍नान करें और किसी मंदिर में जाकर शिवलिंग पर चंदन, धतूरा, आंकड़े के फूल, बिल्वपत्र, जनेऊ, चावल, फल, दूध, मिठाई, नारियल, पंचामृत, दक्षिणाए सूखे मेवे, मिश्री, पान शिवलिंग पर चढ़ाएं।
सावन में शिव पूजा और सोमवार के व्रत से मिलेगा ये लाभ-
सोमवार व्रत का संकल्प सावन में लेना सबसे उत्तम होता है। सावन के अलावा सोमवार का व्रत अन्य महीनों में भी किया जा सकता है।
कुंडली में आयु या स्वास्थ्य बाधा हो या मानसिक स्थितियों की समस्या हो इससे भी छुटकारा मिलता है।
सोमवार का दिन चन्द्र ग्रह का दिन होता है और चन्द्रमा के नियंत्रक भगवान शिव हैं इसलिए इस दिन पूजा करने से न केवल चन्द्रमा बल्कि भगवान शिव की कृपा भी मिल जाती है। 


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