महामीडिया न्यूज सर्विस
मॉब लिंचिंग को लेकर भड़के जावेद अख़्तर

मॉब लिंचिंग को लेकर भड़के जावेद अख़्तर

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 137 दिन 15 घंटे पूर्व
29/07/2019
मुंबई (महामीडिया) मॉब लिंचिंग पर चल रहे विवाद को लेकर शेखर कपूर ने ट्विटर पर 'बुद्धिजीवियों' पर निशाना साधते हुए उनकी तुलना सांप से की थी.
शेखर कपूर ने अपने ट्वीट में लिखा था, "बँटवारे के बाद एक रिफ़्यूजी के रूप में ज़िंदगी शुरू की. मां-बाप ने बच्चों की ज़िंदगी बनाने के लिए सब कुछ दिया. मुझे हमेशा बुद्धिजीवियों से डर लगता रहा. उन्होंने मुझे हमेशा तुच्छ, छोटा होने का अहसास कराया. मुझे आज भी उनसे डर लगता है. मेरी फ़िल्मों के बाद उन्होंने अचानक गले लगा लिया. उनका गले लगाना सांप के डँसने जैसा है. मैं आज भी एक रिफ्यूजी हूं."
असल में देश की जानी मानी 49 हस्तियों ने देश में बढ़ रही मॉब लिंचिंग के ख़िलाफ़ प्रधानमंत्री को एक खुला पत्र लिखा था. इसमें प्रधानमंत्री से मॉब लिंचिंग के ख़िलाफ़ कड़ा क़ानून बनाने की मांग की गई थी. इसके बाद कंगना रानौत, फ़िल्मकार मधुर भंडारकर, विवेक अग्निहोत्री और प्रसून जोशी समेत 60 से अधिक हस्तियों ने एक जवाबी चिट्ठी जारी की थी और मॉब लिंचिंग पर क़ानून की मांग करने वाली हस्तियों को निशाने पर लिया था.
हालांकि शेखर कपूर ने अपनी टिप्पणी में कोई संदर्भ नहीं दिया लेकिन जावेद अख़्तर ने अपने ट्वीट में उन्हें कड़ा जवाब दिया.
जावेद अख़्तर ने लिखा, "ये कौन बुद्धिजीवी थे जिन्होंने आपको गले लगाया और ये गले लगाना आपको सांप के डंसने जैसा लगा? श्याम बेनेगल, अडूर गोपाल कृष्णन, रामचंद्र गुहा? वाक़ई? शेखर साहब आपकी तबीयत ठीक नहीं है. आपको मदद की ज़रूरत है. बात मानिए, एक बढ़िया मनोचिकित्सक से मिलने में कोई शर्म नहीं होनी चाहिए."
उन्होंने लिखा, "अब भी रिफ़्यूजी होने से आपका क्या मतलब है. क्या इसका मतलब है कि आप अब भी ख़ुद को बाहरी महसूस करते हैं, भारतीय नहीं और आपको नहीं लगता कि ये आपकी ही मातृभूमि है? अगर भारत में आप अब भी रिफ़्यूजी हैं तो वो कौन सी जगह है जहां आपको रिफ़्यूजी न होने का अहसास होगा, पाकिस्तान में? अमीर लेकिन अकेला आदमी, ये अतिनाटकीयता बंद कर दीजिए. "
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