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'5 अगस्त' स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज

'5 अगस्त' स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 14 दिन 21 घंटे पूर्व
06/08/2019
नई दिल्ली (महामीडिया) इतिहास में 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस की तरह ही 5 अगस्त का दिन भी जम्मू-कश्मीर की आजादी के लिये स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। 5 अगस्त को गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में धारा 370 हटाने के लिए संकल्प पेश किया। शाह के संसद में प्रस्ताव रखने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अनुच्छेद 370 हटाने के लिए संविधान आदेश (जम्मू-कश्मीर के लिए) 2019 के तहत अधिसूचना जारी कर दी। लद्दाख को अलग केंद्र शासित राज्य बनाया गया है। जम्मू-कश्मीर दिल्ली और पुड्डुचेरी की तरह विधानसभा वाला केंद्रशासित प्रदेश होगा। जम्मू-कश्मीर से धारा 35ए भी समाप्त कर दी गयी है। 
धारा 370 के प्रावधानों के कारण संसद को जम्मू-कश्मीर में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार था। अन्य कार्यों से संबंधित कानून को लागू करवाने के लिए केंद्र को राज्य सरकार की अनुमति चाहिए थी। जम्मू-कश्मीर में भारत के निवासी जमीन नहीं खरीद सकते थे। धारा 370 में समय-समय पर बदलाव भी हुए। 1965 तक वहां राज्यपाल और मुख्यमंत्री नहीं होता था। उनकी जगह सदर-ए-रियासत और प्रधानमंत्री होता था। धारा 370 में हुए बदलावों के आधार पर ही धारा 370 हटाने का सरकार ने फैसला किया है।
जवाहर लाल नेहरू सरकार ने भारतीय संविधान की धारा 370 के तहत यह प्रावधान किया था कि कोई भी नागरिक भारत सरकार के परमिट बना जम्मू-कश्मीर में प्रवेश नहीं कर सकता था। जनसंघ के अध्यक्ष डॉ मुखर्जी ने इस प्रावधान का विरोध किया था। 1952 में एक देश में दो विधान, दो निशान और दो प्रधान, नहीं चलेगा- नहीं चलेगा के नारे के साथ जोरदार प्रदर्शन किया था। 23 जून, 1953 को बीमारी की हालत में उन्हें एक इंजेक्शन दिया गया। डॉ मुखर्जी देश की एकता और अखंडता के लिए बलिदान हो गये। नेहरू ने डॉ मुखर्जी की मां जोगमाया की उनकी मृत्यु की जांच कराने की मांग को अनसुना कर दिया था।
धारा 370 को खत्म करने के फैसले के बाद देश को पूर्ण स्वतंत्रता मिली है। इससे देश की सेना सहित जनता को भी सम्मान मिलेगा। देश के हित में कश्मीर पर लिया गया फैसला अब इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।

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