महामीडिया न्यूज सर्विस
कश्मीर- धारा घटनाक्रम एक 'फिल्म' की तरह ही रहा

कश्मीर- धारा घटनाक्रम एक 'फिल्म' की तरह ही रहा

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 14 दिन 18 घंटे पूर्व
06/08/2019
नई दिल्ली (महामीडिया) केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाये जाने का घटनाक्रम एक फिल्म जैसा ही रहा। इस पूरे घटनाक्रम का आखिरी समय तक रहस्य, रोमांच और सस्पेंस रहा। जिसमें हर कोई अंदाजा लगाता रहा और पता तब चला जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कल संसद में घोषणा की। किसी धमाकेदार फिल्म की तरह सुरक्षबलों की तैनाती हुई, आतंकी खतरे के मद्देनजर परामर्श जारी हुआ, कश्मीर घाटी के राजनीतिक नेताओं को नजरबंद किया गया, इंटरनेट सहित अन्य संचार सेवाएं रोक दी गईं और बीती आधी रात अत्यंत गहमागहमी रही। यह सब जुलाई के अंतिम सप्ताह में तब शुरू हुआ जब केंद्र ने आतंकवाद रोधी अभियानों की मजबूती और कानून व्यवस्था की स्थिति के आधार पर घाटी में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 100 कंपनियों की तैनाती का आदेश दिया। 
हालांकि, राज्य के राजनीतिक दलों और विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार के 'इरादों' पर चिंता जाहिर की और दावा किया कि केंद्र 'कुछ बड़ा करने' की योजना बना रहा है। कश्मीर घाटी में चिंता का माहौल उत्पन्न हो गया जहां श्रीनगर के संवेदनशील इलाकों और कश्मीर के अन्य हिस्सों में अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई। स्थिति शुक्रवार को तब चरम पर पहुंच गई जब सेना ने कहा कि पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी अमरनाथ तीर्थयात्रियों को निशाना बनाने की साजिश रच रहे हैं। इसके साथ ही जम्मू कश्मीर प्रशासन ने परामर्श जारी कर तीर्थयात्रियों और पर्यटकों से तत्काल घाटी छोड़ने को कहा. कयास लगाए जाने लगे कि कश्मीर में हो रहे घटनाक्रम आतंकी खतरे से जुड़े हैं। वहीं, अनेक लोग अनुच्छेद 35-ए और अनुच्छेद 370 पर कोई बड़ी घोषणा होने की अटकलें लगाने लगे। अटकलें तब और बढ़ गईं जब सरकार ने एअरलाइनों से कहा कि वे जम्मू कश्मीर से बाहर जाने वाली उड़ानों के किराए पर नियंत्रण रखें। वहीं, रेलवे ने घोषणा की कि वह कश्मीर से बाहर जा रहे यात्रियों से टिकट रद्द कराने का कोई शुल्क वसूल नहीं करेगा। इस बीच, राज्य के राज्यपाल ने जम्मू कश्मीर के राजनीतिक दलों से कहा कि वे अपने समर्थकों से शांत रहने और घाटी में 'उड़ रहीं अफवाहों' पर विश्वास न करने को कहें। 
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने बैठक में स्वीकार किया गया प्रस्ताव पढ़ते हुए कहा कि दलों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के पास प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया है जो संविधान के अनुच्छेद 35-ए तथा अनुच्छेद 370 को हटाने या निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन या राज्य को तीन हिस्सों में बांटने के किसी भी प्रयास के दुष्परिणामों के बारे में अवगत कराएंगे। बैठक के तुरंत बाद घाटी में तेजी से होते घटनाक्रमों से रहस्य गहरा गया क्योंकि अधिकारियों ने रविवार की रात महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा बढ़ा दी, मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दीं तथा कई नेताओं को या तो 'गिरफ्तार' कर लिया या 'हिरासत' में ले लिया गया। सोमवार की सुबह केंद्रीय कैबिनेट की बैठक हुई. हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में क्या चर्चा हुई, इसके ब्योरे का खुलासा नहीं किया गया। बैठक के तत्काल बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संदेश दिया कि गृह मंत्री अमित शाह संसद में बयान देंगे। इससे कश्मीर के बारे में किसी बड़ी घोषणा की खबरें हवा में तेजी से तैरने लगीं। राज्यसभा की बैठक शुरू होते ही शाह ने अनुच्छेद 370 को खत्म करने की घोषणा की, और इस तरह कई दिनों से चली आ रही अटकलों, चिंता और रहस्य-रोमांच पर विराम लग गया।

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