महामीडिया न्यूज सर्विस
पाकिस्तानी नेताओं की हताशा!

पाकिस्तानी नेताओं की हताशा!

admin | पोस्ट किया गया 41 दिन 5 घंटे पूर्व
08/08/2019
भोपाल (महामीडिया) भारत के जम्मू और कश्मीर की विशेष संवैधानिक स्थिति को रद्द करने के निर्णय के दो दिन बाद, प्रधानमंत्री इमरान खान के नेतृत्व में पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (एनएससी) बुधवार को कई फैसलों की श्रृंखला के साथ सामने आई है। पाकिस्तान ने भारत के साथ राजनयिक संबंधों को कम करने और सभी द्विपक्षीय व्यापार को निलंबित करने का फैसला किया है। बैठक में मौजूद पाकिस्तान के सर्वोच्च सरकारी और सैन्य अधिकारियों ने नई दिल्ली से पाकिस्तान के राजदूत को वापस बुलाने और भारतीय दूत को निष्कासित करने का भी फैसला किया है। उन्होंने 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर कश्मीरियों की एकजुटता के रूप में मनाने का भी निर्णय लिया है।
यह पाकिस्तानी नेतृत्व के हताशा के स्तर को दर्शाता है। चूंकि उन्हें कश्मीर मामले में भारत की कार्रवाई के बाद दुनिया से बहुत खराब प्रतिक्रिया मिली है। पाकिस्तान को समझना चाहिए कि भारत के साथ व्यापार संबंध निलंबित करने से भारत की अर्थव्यवस्था को बिल्कुल प्रभाव नहीं पड़ेगा। भारत के दुनिया के 40 से अधिक देशों के साथ व्यापार संबंध हैं और जिससे एक वर्ष में 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार  होता है, जबकि भारत के साथ पाकिस्तान का व्यापार में योगदान केवल 3 प्रतिशत है। यहां तक कि पाकिस्तान उन शीर्ष 40 देशों की प्राथमिकता सूची में नहीं आता है, जिनके साथ भारत व्यापार करता है। भारत ने पाकिस्तान को उसके संबंधों को कम करने के फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए कहते हुए साफ़ किया कि जम्मू-कश्मीर की स्थिति को बदलने का निर्णय पूरी तरह से हमारा आंतरिक मामला है।
हालांकि,  अलग पड़ा पाकिस्तान, भारत को विश्व मंच पर बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहेगा। इससे पहले, संसद में पीएम इमरान खान ने संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि वह "टीपू सुल्तान का रास्ता" चुनेंगे और "रक्त की अंतिम बूंद तक भारत से लड़ेंगे"। उन्होंने यह भी धमकी दी कि "पुलवामा जैसी घटनाएं और अधिक होंगी"।
पर सच्चाई यह है कि पाकिस्तान के नेताओं और राजनयिकों की हताशा अब अपने चरम पर पहुंच गई है क्योंकि उन्हें अमेरिका से भी कोई अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली है, जिसकी उन्होंने तुरंत प्रतिक्रिया की उम्मीद की थी। चीन को छोड़कर कोई भी देश पाकिस्तान के समर्थन में सामने नहीं आया है।
हुआ यह है कि संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के एक प्रवक्ता ने पाकिस्तान के इस दावे पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि भारत द्वारा जम्मू और कश्मीर की विशेष स्थिति को समाप्त करना सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने भी इस मामले पर एक हल्का बयान जारी किया, जिसने इस मुद्दे पर पाकिस्तान को अलग-थलग कर दिया है।
इस्लामाबाद का भारत के उच्चायुक्त को निष्कासित करना भी एक दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है कि दोनों देशों ने अपने-अपने दूतों को वापस बुलाया है। आखिरी बार, 2002 में दूत को निष्कासित कर दिया गया था, भारत में संसद और अन्य आतंकी हमलों के बाद जब भारत ने तत्कालीन पाक उच्चायुक्त अशरफ जहाँगीर काज़ी को वापस लेने के लिए कहा था। भारत ने 2002 में अपने स्वयं के दूत विजय नांबियार को भी वापस बुला लिया था।
हालांकि, भारत ने कहा कि संबंधों को कमतर करने का पाकिस्तान का फैसला दुनिया के समक्ष द्विपक्षीय संबंधों के बारे में चिंताजनक स्थिति पेश करने की कोशिश है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि "पाकिस्तान द्वारा जो कारण (भारत के साथ राजनयिक संबंधों को कमतर करने के) दिए है वो जमीन पर तथ्यों के साथ मेल नहीं खाते है।"
पाक अधिकारियों को यह समझना चाहिए कि किसी भी हिंसा में वृद्धि और सैन्य प्रतिक्रिया से पाकिस्तान को कोई फायदा नहीं होने वाला है।

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