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भगवान वंशीनारायण मंदिर के पट साल में सिर्फ एक बार खुलते हैं

भगवान वंशीनारायण मंदिर के पट साल में सिर्फ एक बार खुलते हैं

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 11 दिन 19 घंटे पूर्व
09/08/2019
चमोली [ महामीडिया ] उत्तराखंड में चमोली जिले के जोशीमठ विकासखंड की उर्गम घाटी में खूबसूरत बुग्यालों (मखमली घास के मैदान) के मध्य भगवान नारायण का एक ऐसा मंदिर है, जिसके कपाट साल में सिर्फ एक दिन रक्षाबंधन पर्व पर ही खुलते हैं। इसी दिन सूर्यास्त से पूर्व शाम को लगभग चार बजे मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। मान्यता है कि साल के बाकी 364 दिन यहां देवर्षि नारद भगवान नारायण की पूजा-अर्चना करते हैं। मानव को सिर्फ एक दिन ही पूजा का अधिकार है।इस बार कपाट श्रावण पूर्णिमा पर 15 अगस्त को खोले जाएंगे। समुद्रतल से 13 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित भगवान वंशीनारायण मंदिर का निर्माण काल छठी से लेकर आठवीं सदी के मध्य का माना जाता है। ऐसी भी मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण पांडव काल में हुआ था। कत्यूरी शैली में बने दस फीट ऊंचे इस मंदिर का गर्भगृह वर्गाकार है, जहां चतुर्भुज रूप में भगवान विष्णु विराजमान हैं। खास बात यह कि इस मूर्ति में भगवान नारायण व भगवान शिव, दोनों के ही दर्शन होते हैं। मंदिर में भगवान गणेश व वन देवियों की मूर्तियां भी मौजूद हैं।मंदिर का रास्ता बेहद दुर्गम है। यहां पहुंचने के लिए बद्रीनाथ हाइवे पर हेलंग से उर्गम घाटी तक आठ किमी की दूरी वाहन से तय करनी पड़ती है। इसके बाद शुरू होता है 12 किमी का दुश्वारियों भरा सफर। वंशीनारायण मंदिर में मनुष्य को सिर्फ एक दिन पूजा का अधिकार दिए जाने की भी रोचक कहानी है। कहते हैं कि एक बार भगवान विष्णु ने राजा बलि के आग्रह पर पाताल लोक में उनके द्वारपाल की जिम्मेदारी संभाली। तब बहुत दिनों तक भगवान के दर्शन न हो पाने के कारण माता लक्ष्मी देवर्षि नारद के पास वंशीनारायण धाम पहुंचीं और उनसे भगवान नारायण का पता पूछा।

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