महामीडिया न्यूज सर्विस
भाई-बहन के लिए प्यार का मंदिर

भाई-बहन के लिए प्यार का मंदिर

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 7 दिन 18 घंटे पूर्व
13/08/2019
पटना (महामीडिया) बिहार के सीवान जिले में भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक एक मंदिर है। रक्षाबंधन के दिन इस मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। यहां स्थित एक खास पेड़ में भी राखी बांधी जाती है। बहनें यहां राखी चढ़ा कर भाइयों की कलाई पर बांधती हैं। दरौंदा प्रखंड के भीखाबांध गांव स्थित यह मंदिर 'भैया-बहनी' के नाम से जाना जाता है। यूं तो सालों भर यहां श्रद्धालु पूजा कर मन्नतें मांगते हैं। लेकिन, श्रावण, पूर्णिमा और भाद्र शुक्ल पक्ष अनंत चतुर्दशी के दिन बिहार और झारखंड से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु आकर पूजा-अर्चना करते हैं और मन्नते मांगते हैं।
यहां की लोककथा के अनुसार, मुगल शासनकाल में एक व्यक्ति अपनी बहन की रक्षा के दो दिन पूर्व उसकी ससुराल भभुआ से विदा कराकर घर ले जा रहा था। भीखाबांध के समीप मुगल सैनिकों की नजर उन पर पड़ गयी और मुगल सिपाहियों की नीयत खराब हो गयी। वे डोली को रोक कर बहन के साथ बदतमीजी करने लगे। इसके बाद मुगल सिपाहियों से बहन को विदा करा कर आ रहा भाई भिड़ गया। सिपाहियों की संख्या अधिक होने के कारण भाई अकेला और कमजोर पड़ गया। मुगल सिपाहियों ने उसे मार डाला।
बहन खुद को असहाय देख कर भगवान को पुकारने लगी। कहा जाता है कि अचानक धरती फटी और दोनों धरती के अंदर चले गये। डोली लेकर चल रहे चारो कहार भी बगल के कुएं में कूद कर अपनी जानें दे दी थीं। कहते हैं कि जहां भाई-बहन धरती में समाये थे। वहीं, दो बरगद के पेड़ उग आये। दोनों वट वृक्ष ऐसे हैं कि देखने में ऐसा प्रतीत होता है कि भाई अपनी बहन की रक्षा कर रहा है। 
यह मंदिर अब भाई-बहन के प्रेम का केंद्र बन गया है। इस स्थान के प्रति लोगों की अटूट आस्था है। पूजा के वक्त यहां काफी भीड़ लगती है। रक्षाबंधन के दिन यहां पेड़ में भी राखी बांधी जाती है। बहनें यहां राखी चढ़ा कर अपने भाइयों की कलाइयों में बांधती है।
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