महामीडिया न्यूज सर्विस
देश भर में जन्माष्टमी की धूम

देश भर में जन्माष्टमी की धूम

admin | पोस्ट किया गया 27 दिन 3 घंटे 14 सेकंड पूर्व
23/08/2019
भोपाल (महामीडिया) भारत सहित विदेशों में भी जन्माष्टमी पर्व आज धूमधाम से मनाया जा रहा है। हालांकि इस बार जन्माष्टमी दो दिन है। पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 23 अगस्त को सुबह 8.09 बजे से 24 अगस्त को सुबह 8.32 बजे तक है। जबकि रोहिणी नक्षत्र जिसमें भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था वह 24 अगस्त को सुबह 3.48 बजे से शुरू होगा और ये 25 अगस्त को सुबह 4.17 बजे उतरेगा। जबकि कुछ ज्योतिषियों को ये भी मानना है कि रोहिणी नक्षत्र 23 अगस्त को रात 11.56 बजे से लग जाएगा। अब मंथन यही किया जा रहा है कि ऐसा वक्त जब रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि दोनों एक साथ पड़े तो उत्तम 23 अगस्त की तारीख है। ऐसे में 23 अगस्त ही जन्माष्टमी मनाने के लिए शुभ होना चाहिए। हालांकि, कई जानकार 24 अगस्त को जन्माष्टमी मनाने का तर्क अलग से दे रहे हैं।  
ज्योतिष के जानकार बताते हैं कि जन्माष्टमी के दिन व्रत रखने वाले पारण अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र उतरने के बाद ही करें। अगर दोनों का संयोग साथ नहीं हो पा रहा तो अष्टमी या फिर रोहिण नक्षत्र उतरने के बाद व्रत का पारण करना चाहिए। मथुरा और वृंदावन में इस उत्सव की तैयारियां हो चुकी हैं। मंदिरों को फूलों से सजाया गया है। पूरा का पूरा मथुरा और वृंदावन भक्तिमय हो गया हैं। बजते ढोल-नगाड़े, मृदंग, तालियों की गड़गड़ाहट, शंख ध्वनि और नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की, हाथी-घोड़ा पालकी, जय हो नंद गोपाल की। कुछ ऐसा ही माहौल कृष्ण मंदिरों में है। हर कोई हरे रामा हरे कृष्णा में रमे नजर आ रहा है।
इस दिन प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत होकर भगवान श्रीकृष्ण के व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद केले, आम और अशोक की पत्तियों से मंडप तैयार फिर पालना सजाया जाता है। इस दिन घर के मुख्यद्वार पर मंगल कलश एवं मूसल स्थापित कर मध्य रात्री को शंख और घंटे की ध्वनि के बीच गर्भ के प्रतीक नार वाले खीरे से भगवान का जन्म करवाया जाता है। तत्पश्चात पंचोपचार पूजन की जाती हैं। भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति को एक पात्र में रख कर दुग्ध, दही, शहद, पंचमेवा और सुंगध युक्त शुद्घ जल और गंगा जल से स्नान कराकर पालने में स्थापित कर पीले वस्त्र पहनायें। इसके बाद विधि विधान से आरती करें। अंत में उन्हें नैवैद्य अर्पित करें। इस दौरान भगवान के निकट एक बांसुरी रखना शुभ माना जाता है। 

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