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राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने 18 साल पहले भी अजीत जोगी को माना था सतनामी

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने 18 साल पहले भी अजीत जोगी को माना था सतनामी

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 15 दिन 17 घंटे पूर्व
01/09/2019
रायगढ़ [महामीडिया ]  राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने 18 साल पहले ही 2001 में भी पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को आदिवासी नहीं मानकर उनके जाति प्रमाण पत्र को फर्जी करार दिया था। आयोग ने अपने फैसले में जोगी को सतनामी बताकर उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के भी आदेश दिए थे, लेकिन जोगी इसके खिलाफ हाईकोर्ट से स्टे आर्डर ले आए थे।गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री जोगी बतौर सांसद रायगढ़ से पहला चुनाव लड़ा था। साल 1998 में लोकसभा चुनाव में अजीत जोगी कांग्रेस की टिकट से सांसद बने तो चुनाव के दौरान ही उनके प्रतिद्वंदी रहे भाजपा के नंद कुमार साय की ओर से उनकी जाति को लेकर आपत्ति की गई थी। साय के निर्वाचन अभिकर्ता रहे सुगनचंद फरमानिया ने बताया कि पार्टी ने सभी रिकॉर्ड एकत्र कर रिटर्निंग अफसर के पास शिकायत की थी, लेकिन अंतिम समय बीत जाने के कारण उस पर कुछ नहीं हो सका। इसके बाद भाजपा नेता गिरधर गुप्ता ने जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका भी लगाई लेकिन हाईकोर्ट में लिस्टिंग के बाद नंबर आने से पहले ही केन्द्र सरकार गिर गई। ऐसे में कोर्ट ने पार्टी की इस याचिका को औचित्यहीन बताकर खारिज कर दिया था।13 महीने की दिल्ली सरकार के इस कार्यकाल में सासंद बने जोगी इसके बाद रायगढ़ लोकसभा सीट छोड़कर शहडोल चले गए थे। वहीं जोगी के सीएम बनने के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग में भी संत कुमार नेताम ने शिकायत की थी। इस पर आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष दिलीप सिंह भूरिया ने 16 अक्टूबर 2001 को आदेश पारित कर जोगी को सतनामी बताया था। इसके बाद आदिवासी प्रमाण पत्र को खारिज कर उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के आदेश दिए थे।

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