महामीडिया न्यूज सर्विस
गणेश चतुर्थी आज है

गणेश चतुर्थी आज है

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 70 दिन 23 घंटे पूर्व
02/09/2019
भोपाल (महामीडिया) आज देशभर में गणेश चतुर्थी का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस दिन लोग अपने घरों में भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना करते हैं और 9 दिनों तक इसकी पूजा अर्चना करते हैं। और 10वें दिन धूमधाम के साथ भगवान गणेश की मूर्ति का विसर्जन करते हैं। भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद माह के शुक्लपक्ष की चतुर्थी और स्वाति नक्षत्र और सिंह लग्न में हुआ था। इसलिए गणेश चतुर्थी की पूजा हमेशा दोपहर के समय की जाती है।

गणेश चतुर्थी शुभ मुहूर्त: 
सुबह 09 बजकर 10 मिनट से लेकर 10 बजकर 45 मिनट तक गणपति स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त है। इसके अलावा दोपहर 02 बजे से रात 08 बजकर 06 मिनट तक का समय भी शुभ है। इस दौरान गणपति की स्थापना कर सकते हैं।

कब शुरू हो रही है गणेश चतुर्थी तिथि
गणेश चतुर्थी 02 सितंबर दिन सोमवार को सुबह 9 बजकर 1 मिनट से शुरू होने जा रही है, जो 3 सितंबर सुबह: 6 बजकर 50 मिनट तक है। 

कैसे करें गणपति की स्‍थापना?
गणपति की स्‍थापना गणेश चतुर्थी के दिन मध्‍याह्न में की जाती है। मान्‍यता है कि गणपति का जन्‍म मध्‍याह्न काल में हुआ था। साथ ही इस दिन चंद्रमा देखना वर्जित है। गणपति की स्‍थापना की विधि इस प्रकार है: 
- आप चाहे तो बाजार से खरीदकर या अपने हाथ से बनी गणपति बप्‍पा की मूर्ति स्‍थापित कर सकते हैं।
- गणपति की स्‍थापना करने से पहले स्‍नान करने के बाद नए या साफ धुले हुए वस्‍त्र पहनने चाहिए। 
- इसके बाद अपने माथे पर तिलक लगाएं और पूर्व दिशा की ओर मुख कर आसन पर बैठ जाएं।
- आसन कटा-फटा नहीं होना चाहिए। साथ ही पत्‍थर के आसन का इस्‍तेमाल न करें। 
- इसके बाद गणेश जी की प्रतिमा को किसी लकड़ी के पटरे या गेहूं, मूंग, ज्‍वार के ऊपर लाल वस्‍त्र बिछाकर स्‍थापित करें। 
- गणपति की प्रतिमा के दाएं-बाएं रिद्धि-सिद्धि के प्रतीक स्‍वरूप एक-एक सुपारी रखें।

गणेश चतुर्थी की पूजन विधि-
- सबसे पहले घी का दीपक जलाएं। इसके बाद पूजा का संकल्‍प लें। 
- फिर गणेश जी का ध्‍यान करने के बाद उनका आह्वन करें। 
- इसके बाद गणेश को स्‍नान कराएं. सबसे पहले जल से, फिर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और चीनी का मिश्रण) और पुन: शुद्ध जल से स्‍नान कराएं।
- अब गणेश जी को वस्‍त्र चढ़ाएं. अगर वस्‍त्र नहीं हैं तो आप उन्‍हें एक नाड़ा भी अर्पित कर सकते हैं। 
- इसके बाद गणपति की प्रतिमा पर सिंदूर, चंदन, फूल और फूलों की माला अर्पित करें। 
- अब बप्‍पा को मनमोहक सुगंध वाली धूप दिखाएं। 
- अब एक दूसरा दीपक जलाकर गणपति की प्रतिमा को दिखाकर हाथ धो लें. हाथ पोंछने के लिए नए कपड़े का इस्‍तेमाल करें। 
- अब नैवेद्य चढ़ाएं। नैवेद्य में मोदक, मिठाई, गुड़ और फल शामिल हैं। 
- इसके बाद गणपति को नारियल और दक्षिण प्रदान करें। 
- अब अपने परिवार के साथ गणपति की आरती करें. गणेश जी की आरती कपूर के साथ घी में डूबी हुई एक या तीन या इससे अधिक बत्तियां बनाकर की जाती है। 
- इसके बाद हाथों में फूल लेकर गणपति के चरणों में पुष्‍पांजलि अर्पित करें। 
- अब गणपति की परिक्रमा करें। ध्‍यान रहे कि गणपति की परिक्रमा एक बार ही की जाती है। 
- इसके बाद गणपति से किसी भी तरह की भूल-चूक के लिए माफी मांगें। 
-  पूजा के अंत में साष्टांग प्रणाम करें।

गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश से जुड़ी कुछ रोचक बातें इस प्रकार हैं। 'गण' का अर्थ होता है विशेष समुदाय और 'ईश' का अर्थ होता है स्वामी। सभी शिवगणों और देवगणों के स्वामी होने के कारण सबको गणेश कहा जाता है।

पूरे देश में गणेश चतुर्थी की इस तरह हो रही है तैयारी-
गणेश चतुर्थी को लेकर हर तरफ तैयारी शुरु हो गई है, गजानन की आकर्षक मूर्तियां गढ़ने के लिए हजारों कारीगर दिनरात लगे हुए हैं। 2 सितंबर शुरू होने जा रहा इस महापर्व की तैयारियों में सैंकड़ों शिल्पकार गणपति बप्पा की रंग-बिरंगी मूर्तियां तैयार करने में जुटे हैं। 

सबसे पहले इस त्योहार की शुरुआत कहां से हुई:
बता दें कि गणेश चतुर्थी सबसे पहले महाराष्ट्र मनाई गई। यूं तो गणेशोत्सव पूरे देश में धूम-धाम से मनाया जाता है लेकिन जैसा महाराष्ट् में मनाया जाता है वैसा भव्य नजारा कहीं और देखने को नहीं मिलता है। दरअसल महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी की धूम ही होती है। इसे मनाने के पीछे आज़ादी की लड़ाई की एक कहानी जुड़ी हुई है। 1890 के दशक में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बाल गंगाधर तिलक अक्‍सर मुंबई की चौपाटी पर समुद्र के किनारे जाकर बैठते थे और सोचते थे कि कैसे लोगों को एकसाथ लाया जाए। वहीं उनके दिमाग में एक विचार आया कि क्यों न गणेश चतुर्थी को सार्वजनिक स्थल पर मनाया जाए और इसकी वजह से हर वर्ग के लोग इसमें शामिल हो सकेंगे। 

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