महामीडिया न्यूज सर्विस
उनका काम के प्रति जुनून बस जादुई था

उनका काम के प्रति जुनून बस जादुई था

admin | पोस्ट किया गया 9 दिन 8 घंटे पूर्व
09/09/2019
भोपाल (महामीडिया) प्रख्यात वकील-राजनेता राम जेठमलानी (95) जो पिछले दो सप्ताह से लगातार चिकित्सकों को देखरेख में थे, ने रविवार सुबह अपने दिल्ली स्थित आवास पर अंतिम सांस ली। स्वभाव से विद्रोही स्वाभाव के होने के बावजूद, उन्हें मुख्यतः मुखर और एक अपरंपरागत व्यक्ति के रूप में देखा जाता था। विवाद तो जैसे उनके नाम से ही जुड़ा हुआ था पर उन्होंने न्यायपालिका के खिलाफ कभी कुछ नहीं कहा । जेठमलानी को आपराधिक कानून के प्रमुख के रूप में देखा जाता  था और  वे भारत के सबसे ज्यादा शुल्क लेने वाले अधिवक्ताओं में से एक थे।
जितनी मेहनत वह अपने काम में लगाते थे, उसका मुक़ाबला कोई दूसरा वकील नहीं कर सकता। उन्होंने अपने सभी मामलों के लिए एक अनुशासित समयरेखा तय की हुई थी। वह सुबह 10 बजे से शाम 4:30 बजे तक ही बहस करते थे और फिर देर शाम तक केस की कॉन्फ्रेंस चलती थी। उनकी यह दिनचर्या उनके अस्सी और नब्बे उम्र के होने के बाद भी जारी थी ।
वह एक जीनियस थे, जेठमलानी को कई चीज़ों को पहले करने का श्रेय जाता है।  वह पहले और एकमात्र वकील थे जिन्हे मात्र 18 वर्ष की आयु में अभ्यास करने की अनुमति प्राप्त हुई थी।  जबकि उस समय कानून का अभ्यास करने की न्यूनतम आयु 21 वर्ष हुआ करती थी।  उन्हें ना सिर्फ सबसे कम बल्कि सबसे ज्यादा उम्र के बार काउंसिल के सदस्य होने का भी गौरव प्राप्त हुआ । वह 17 साल के थे जब उन्होंने कराची के एस.सी शाहनी लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री हासिल की। 14 सितंबर, 1923 को सिंध के सिकरपुर में जन्मे जेठमलानी एक विभाजन शरणार्थी थे। अपने सात दशकों से अधिक समय के कानूनी करियर में उन्होंने कई बड़े नामों का कोर्ट में प्रतिनिधित्व किया जिसमें कई वरिष्ठ राजनेताओं से लेकर विवादास्पद व्यापारियों और राजनीतिक हत्यारे तक शामिल हैं।
श्री जेठमलानी ने उन मामलों में भी न्याय के लिए आवाज़ उठायी, जिनमें वे उपस्थित नहीं थे। सोली सोराबजी, फली नरीमन जैसे दिग्गजों ने कई मामलों में उनसे सलाह ली। वह अपनी बात पर अडिग रहने वाले व्यक्ति थे। उन्होंने एनजेएसी (नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट कमीशन) बिल का विरोध सिर्फ एक वकील के रूप में ही नहीं, बल्कि एक सांसद के रूप में भी किया। अगर हम देश के शीर्ष वकीलों का क्रम निकले तो श्री जेठमलानी  शीर्ष 10 लोगों में जरूर काबिज होंगे।
अपने मन की बात को अदम्य साहस से कहने में माहिर, वह काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाले एकमात्र योद्धा बनकर उभरे और भारतीय जनता पार्टी के सबसे मजबूत विरोधियों में से एक थे। यह जेठमलानी ही थे जिन्होंने एक अंग्रेजी अखबार को 13 लाख रुपये दिए, जिसने विज्ञापन के माध्यम से सरकार से काले धन के मुद्दे पर 12 सवाल पूछे थे । जैसा कि विवाद से उनका पुराना नाता था, श्री जेठमलानी ने अपने विवादित फैसलों से देशवासियों को भी निराश कर दिया था जैसे उन्होंने बलात्कार के आरोपी स्वयंभू भगवान आसाराम बापू का बचाव किया था । बाद में, वॉल स्ट्रीट जर्नल के साथ एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि उन्होंने बापू को अपने ग्राहक के रूप में इसलिए स्वीकार किया था  क्योंकि वह उन्हें अच्छी तरह से भुगतान कर रहे थे । भारत के सबसे अधिक कमाने वाले वकील ने कहा था कि उन्होंने केवल उन्हीं से ही शुल्क लेते हैं जो इसका वहन कर सकते हैं।  
इस महानायक को श्रद्धांजलि देते हुए अटॉर्नी-जनरल के के वेणुगोपा ने कहा की  उनकी स्पष्टवादिता ने उन्हें देश के सबसे बेहतरीन वकीलों में से एक के रूप में स्थापित किया और उनका निधन संसद और पूरे देश के लिए भी एक नुकसान है।
-प्रभाकर पुरंदरे



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