महामीडिया न्यूज सर्विस
चन्द्रमा पर अमेरिका और रूस भी कई बार फेल हुए

चन्द्रमा पर अमेरिका और रूस भी कई बार फेल हुए

admin | पोस्ट किया गया 95 दिन 8 घंटे 2 सेकंड पूर्व
10/09/2019
नई दिल्ली (महामीडिया) भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो का चंद्रयान 2 मिशन अपनी तय योजना के अनुसार भले ही पूर्ण सफल नहीं रहा हो किंतु भारतीय वैज्ञानिक लगातार दिन-रात इस मिशन को सफल बनाने की पूर्ण कोशिश कर रहे हैं। अगर चंद्रयान 2 चांद की सतह पर सही से उतर जाता तो भारत ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाता साथ ही चांद के साउथ पोल पर उतरने वाला भारत पहला देश होता। हालांकि लैंडर का अंतिम समय में जमीनी स्टेशन से संपर्क टूट गया। 
ऐसा नहीं है कि भारत को ही यह असफलता हाथ लगी है इससे पहले भी दुनिया के बड़े देश इस मिशन को पूर्ण करने में असफल रहे हैं। भारत से पहले चंद्रमा पर दुनिया के केवल 6 देशों या एजेंसियों ने अपने यान भेजे हैं, जिनमें सिर्फ 3 देश- अमेरिका, रूस और चीन को ही चांद पर पहुंचने में अबतक सफलता मिली है।
सबसे पहले 1958 में अमेरिका ने चंद्र मिशन शुरू किया था, लेकिन उसका मिशन पाइनियर लॉन्च असफल रहा था। अमेरिका को 6 मिशन के बाद सफलता मिली। जिसके बाद अमेरिका ने 20 जुलाई 1969 को अपोलो 11 मिशन के जरिए चांद पर यान उतारा था। अमेरिका के अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग और बज एल्ड्रिन चांद पर उतरने वाले पहले और दूसरे अंतरिक्ष यात्री थे। अमेरिका ने 1958 से 1972 तक करीब 31 मिशन भेजे। इनमें से 17 फेल हो गए।
वहीं रूस यानी तत्कालीन सोवियत संघ ने चंद्रमा की सतह पर अपना यान उतारने वाला पहला देश बना। रूस के मिशन का नाम 'लूना 2' था जो 12 सितंबर 1959 को चांद की सतह पर पहुंचा। रूस के लूना 2 मिशन को कामयाबी मिली। एक साल से थोड़े अधिक समय के भीतर अगस्त 1958 से नवंबर 1959 के दौरान अमेरिका और सोवियत संघ ने 14 अभियान शुरू किए। इनमें से सिर्फ 3- लूना 1, लूना 2 और लूना 3 - सफल हुए। ये सभी सोवियत संघ ने शुरू किए थे। रूस ने 23 सितंबर 1958 से 9 अगस्त 1976 तक करीब 33 मिशन भेजे। इनमें से 26 फेल हो गए। अमेरिका और रूस ने कुल मिलाकर 64 मिशन चांद पर भेजे, जिसमें 43 बार सफलता तो 21 बार असफलता हाथ लगी।
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