महामीडिया न्यूज सर्विस
देश को एकल उपयोग वाले प्लास्टिक से मुक्त बनाने का संकल्प लें!

देश को एकल उपयोग वाले प्लास्टिक से मुक्त बनाने का संकल्प लें!

admin | पोस्ट किया गया 49 दिन 18 घंटे पूर्व
03/10/2019
भोपाल (महामीडिया) पीएम मोदी की साल 2022 तक देश को पूरी तरह से प्लास्टिक मुक्त बनाने की योजना के अन्तर्गत केंद्र सरकार ने सभी प्रकार के प्लास्टिक कैरी बैग, प्लास्टिक कटलरी, और कप, स्टायरोफोम (थर्मोकोल) से बने सजावटी सामग्री और संबंधित वस्तुओं पर प्रतिबंध लगा दिया है । हालांकि केंद्र ने पीईटी प्लास्टिक से बनी पानी की बोतलों को इस सूची से बाहर रखा है । सभी सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और निजी कंपनियों को पीईटी प्लास्टिक की पानी की बोतलों के उपयोग को हतोत्साहित करने का भी निर्देश दिया गया है। प्लास्टिक के जिन प्रोडक्ट पर प्रतिबंध लगाया गया है, उनमें प्लास्टिक बैग, कप, प्लेट, छोटी बोतल, प्लास्टिक स्ट्रा और कुछ टाइप की पैकिंग प्लास्टिक है।
इस तरह के एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक से समस्या होती है, विशेष रूप से पैकेज्ड पेयजल, मसालों और अन्य उत्पादों में। इस साल देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ के दौरान भी परेशानियों का सामना करना पड़ा जिससे नदियों के किनारों पर प्लास्टिक का अम्बार लग गया, जिससे इस उत्पाद को प्रभावी ढंग से निपटने के प्रति लोगों की जागरूकता और बुनियादी व्यवस्थाओ की कमी को उजागर किया । एकल उपयोग वाले प्लास्टिक की पहली छह वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाने से भारत की सालाना खपत, लगभग 14 मिलियन टन प्लास्टिक में से 5 से 10 प्रतिशत पर कमी लायी  जा सकेगी।  
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2017-18 में प्रतिदिन प्लास्टिक कचरे से 26,000 टन (टीपीडी) उत्पन्न हुआ। उसमें से, 15,600 टीपीडी, या 60 प्रतिशत का ही रीसाइकल किया गया। बाकी सड़कों पर, गड्ढों या नदियों में कूड़े के रूप में बिखरे रहते है । इस अनियंत्रित प्लास्टिक के कचरे से भूमि और पानी में रहने वाली सभी प्रजातियों के लिए एक बड़ा खतरा है।
इसी तरह, नेचर कम्युनिकेशन पत्रिका में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक, हर साल लगभग आठ मिलियन टन प्लास्टिक कचरा समुद्र में फैक दिया जाता है।  अकेले गंगा नदी से ही 2015 में 1.15 लाख टन प्लास्टिक समुद्र में गिरा था। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भारत पैकेज्ड खाद्य उत्पादों का एक बहुत बड़ा बाजार है। भारत में प्लास्टिक कचरे के सबसे बड़े हिस्से के लिए आलू के चिप्स पैकेट और कन्फेक्शनरी पैकेट जिम्मेदार हैं। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्लास्टिक पैकेजिंग का सत्तर प्रतिशत बहुत कम समय में ही कचरे में तब्दील हो जाता है।
हालांकि, भारत की प्लास्टिक रीसाइक्लिंग दर 60 प्रतिशत है, जो वैश्विक औसत-20 प्रतिशत से तीन गुना अधिक है, और भारत की प्रति व्यक्ति प्लास्टिक की खपत- 2014-15 में 11 किलो थी, जो वैश्विक औसत-28 किलो से आधे से भी कम है। विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ ऐसी सामग्रियां हैं जो प्लास्टिक की तरह बहुउपयोगी हैं , जिनमें से अधिकांश तेल, प्राकृतिक गैस और कोयले से बनाई जाती हैं। यह पैक किए गए खाद्य पदार्थों को स्टोर अलमारियों पर लंबे समय तक बनाये रखने और परिवहन के दौरान अत्यधिक तापमान को नियंत्रित कर सकते हैं।
पीएम मोदी ने बापू की धरती गुजरात के साबरमती रिवरफ्रंट से 150वीं गांधी जयंती पर हिंदुस्तान को खुले में शौच मुक्त घोषित किया। इस अवसर पर उन्होंने हर भारतवासी को राष्ट्रवाद के हर संकल्प को सिद्ध करने का संकल्प लेने का आग्रह किया।  उन्होंने कहा कि ''मैं आज देश से 'एक व्यक्ति-एक संकल्प' का आग्रह करता हूं। देश के लिए कोई भी संकल्प लीजिए, लेकिन लीजिए जरूर। अपने कर्तव्यों के बारे में सोचिए, राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों के बारे में सोचिए, कर्तव्य पथ पर चलते हुए, 130 करोड़ प्रयास, 130 करोड़ संकल्पों की ताकत, देश में कितना कुछ कर सकती है। आज संकल्प लेकर अगले एक साल तक हमें निरंतर इस दिशा में काम करना है। एक साल काम किया, तो फिर यही हमारे जीवन की दिशा बन जाएगी। यही हमारी जीवनशैली बन जाएगी। यही एक कृतज्ञ राष्ट्र की बापू को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।''
तो आइए, एक संकल्प करें और अपनी जीवनशैली में बदलाव कर स्वयं से साथ-साथ देश की उन्नति के भी भागिदार बनें।। जिससे हम सब मिलकर बापू के सपनों का भारत, नया भारत बना पाए।  
प्रभाकर पुरंदरे
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