महामीडिया न्यूज सर्विस
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का कश्मीर पर यू-टर्न

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का कश्मीर पर यू-टर्न

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 42 दिन 18 घंटे पूर्व
10/10/2019
भोपाल (महामीडिया) ममल्लापुरम में बहुप्रतीक्षित भारत-चीन शिखर सम्मेलन से दो दिन पहले, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने यू-टर्न लेते हुए कश्मीर पर एक चौंकाने वाला बयान दिया और कहा कि इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के मुताबिक हल किया जाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय मंचों और यूनाइटेड नेशन पर अलग-थलग पड़ने के बाद, जिनपिंग ने अपने पुराने मित्र पाकिस्तान को सांत्वना देते हुए कहा कि कश्मीर का मुद्दा उसके इतिहास से ही विवादित है और इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार उचित और शांतिपूर्वक हल किया जाना चाहिए।
पाकिस्तान के हितों और कश्मीर पर उसके रुख की रक्षा करते हुए, जिनपिंग ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्थितियों में क्या बदलाव आ रहे हैं, चीन और पाकिस्तान के बीच दोस्ती हमेशा अटूट और मजबूत रही है। जैसी कि उम्मीद थी, जिनपिंग ने यह उस समय किया जब वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक बड़ी बैठक करने वाले है । हम सभी जानते हैं कि चीन कभी भी भारत का भरोसेमंद दोस्त नहीं रहा है । चीन ने पहले भी कई बार भारत को धोखा दिया है। क्या यह पाकिस्तान की सरजमीं पर संचालित हो रहे आतंकी शिविरों, सीमा पार आतंकवाद और कश्मीर के मुद्दे पर भारत के कड़े रुख का असर है। पाकिस्तान का समर्थन करने के पीछे, चीन के हित को दुनिया अच्छे से जानती है। वास्तव में, चीन कभी भी नहीं चाहेगा कि भारत और पाकिस्तान के बीच शांतिपूर्ण संबंध स्थापित हो ।
कश्मीर पर चीन के यू-टर्न ने कश्मीर की वर्तमान स्थिति पर भारत की चिंता बढ़ा दी है जैसा कि केंद्र सरकार के अनुच्छेद 370 और 35A, जिससे  भारतीय संघ के भीतर ही कश्मीर को विशेष दर्जा प्राप्त था, को समाप्त करने को दो महीने बीत चुके हैं।
कर्फ्यू हटाना, संचार माध्यम को दुरुस्त करना और घाटी में सामान्य स्थिति बहाल करना केंद्र सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। क्योंकि दुनिया कश्मीर के वास्तविक हालात पर नज़र रखे हुए है। राज्य को अधिक समय तक प्रतिबंधों के अधीन रखने से जोखिम बढ़ सकता है । साथ ही, लंबे समय तक राजनेताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की नजरबंदी से शून्यता पैदा हो सकती है और ऐसी स्थिति से उग्रवादियों को फायदा हो सकता है। केंद्र सरकार को हिरासत में लिए गए राजनेताओं को धीरे-धीरे रिहा किया जाना चाहिए, जिससे वो सामान्य राजनीतिक गतिविधियों को फिर से शुरू कर सकें ।
हालांकि, केंद्र सरकार अच्छा काम कर रही है और हमें उम्मीद है कि स्थिति जल्द ही सामान्य हो जाएगी। हिरासत में लिए गए पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला को नेशनल कांफ्रेंस के प्रतिनिधिमंडल से मिलने देना और हाल ही में पर्यटकों को कश्मीर आने का निमंत्रण दिया जाना एक सकारात्मक संकेत है । ऐसी खबरें हैं कि राज्य में 96,000 लैंडलाइन में से 73,000 ने काम करना शुरू कर दिया है। हम उम्मीद कर सकते हैं कि घाटी में जल्द ही स्वस्थ राजनीतिक गतिविधियां बढ़ेंगी और दुनिया भर के पर्यटक वहां जाकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
-प्रभाकर पुरंदरे

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