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अयोध्या: अंतिम निर्णय का इंतजार

अयोध्या: अंतिम निर्णय का इंतजार

admin | पोस्ट किया गया 34 दिन 16 घंटे पूर्व
18/10/2019
भोपाल (महामीडिया) 6 दिसंबर, 1992 को राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद के विवादित ढांचे को ध्वस्त करने के लगभग 27 साल बाद, बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अंतिम सुनवाई पूरी करने के साथ ही खत्म हुई। हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों द्वारा दायर टाइटल-सूट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील पर देश की शीर्ष अदालत की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 40 दिनों में यह सुनवाई पूरी की है।
बुधवार को जुलाई 2010 के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपील पर 40-दिवसीय सुनवाई समाप्त हुई, जिसने 2.77 एकड़ को तीन भागों में विभाजित किया गया था - पहला भाग जिसमें ध्वस्त मस्जिद के गुंबद वाला क्षेत्र आता हैं, वो राम लल्ला स्वयं (हिंदू सभा द्वारा प्रतिनिधित्व) के पास गया, दूसरा निर्मोही अखाड़ा संप्रदाय को, जबकि तीसरा यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास गया।
मध्यस्थता में समझौते के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा मांगी गई क्षतिपूर्ति भी पूरी तरह से उचित लगती है। वो चाहते हैं कि उपासना स्‍थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, १९९१ की तहत १५ अगस्त 1947 तक अस्तित्व में आए हुए किसी भी धर्म के पूजा स्थल में परिवर्तित करने से रोक लगा दी जाए ताकि अन्य सभी मंदिर-मस्जिद विवाद समाप्त हो जाएं। बोर्ड ने वैकल्पिक स्थल पर मस्जिद बनाने, अयोध्या की पुरानी मस्जिदों की मरम्मत और जीर्णोद्धार और प्रार्थना के लिए चुनिंदा एएसआई-प्रबंधित मस्जिदों के निर्माण की अनुमति भी मांगी। यह हिंदू-मुस्लिम संबंधों को रीसेट करने, पुराने घावों को भरने और अयोध्या में एक नई शुरुआत हासिल करने का एक अवसर है। हालांकि, उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील ने गुरुवार को अयोध्या टाइटल सूट मामले में कहा कि इस विवाद में समझौता वार्ता संभव नहीं है। उनका बयान तब सामने आया जब वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जफर अहमद फारूकी की ओर से कोर्ट में  एक आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसमें इस केस से अपना दावा वापस लिए जाने की बात कही गई है।
वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि समझौते का समय समाप्त हो गया है क्योंकि समझौता सभी दलों के बीच हो रहा है और कोई भी बोर्ड और भारत सरकार इसमें शामिल नहीं है। भारत सरकार तो इसमें कोई पार्टी भी नहीं है। हालाँकि, जैसे अंतिम फैसले का इंतजार किया जा रहा है, उससे दिसंबर 1992 में विवादित ढांचे के विध्वंस को भुलाया नहीं जा सकता, यह देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने और उसकी संवैधानिक संस्कृति के खिलाफ एक अपराध था। मस्जिद के नीचे एक हिंदू ढांचे के कथित सबूत केवल खुदाई के बाद सामने आए थे। ऐसे साक्ष्यों पर किया गया कोई भी निर्णय, जो न्यायालय को उपलब्ध नहीं होता, यदि मालिकाना हक दशकों पहले ही निपटा लिया गया होता, तो विध्वंस को वैध बनाने वाली न्यायिक प्रणाली को राशि दी जा सकती है। अब, ऐसा लगता है कि मंदिर निर्माण होकर ही रहेगा। जश्न की शुरुआत भी हो गई हैं। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में भव्यता के साथ दिवाली मानाने की तैयारी शुरू कर दी है। पूरा देश अयोध्या के लिए खुशखबरी का इंतजार कर रहा है।
- प्रभाकर पुरंदरे

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