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उत्तराखंड के जंगलों में 12 साल बाद नीलकुरेंजी के फूलों ने अपनी आभा बिखेरी

उत्तराखंड के जंगलों में 12 साल बाद नीलकुरेंजी के फूलों ने अपनी आभा बिखेरी

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 24 दिन 18 घंटे पूर्व
19/10/2019
उत्‍तरकाशी (महामीडिया) सीमांत उत्तरकाशी और टिहरी जिले के जंगल इन दिनों नीलकुरेंजी के फूलों से लदे हुए हैं। ठीक 12 साल बाद गढ़वाल क्षेत्र के जंगलों में नीलकुरेंजी के फूलों ने अपनी रंगत बिखेरी है। सरकारी तंत्र की उपेक्षा के कारण नीलकुरेंजी केरल की तरह उत्तराखंड में प्रसिद्धि नहीं पा सका है। जबकि, पहाड़ में इस फूल को बेहद शुभ माना जाता है। जिस वर्ष यह फूल खिलता है उस वर्ष को नीलकुरेंजी वर्ष भी कहते हैं। औषधीय गुणों से भरपूर नीलकुरेंजी को उत्तरकाशी में अडगल कहा जाता है।
नीलकुरेंजी के नीले-बैंगनी रंग के फूलों ने इन दिनों धरती का शृंगार किया हुआ है। उत्तरकाशी वन प्रभाग, अपर यमुना वन प्रभाग व टौंस वन प्रभाग के अलावा टिहरी वन प्रभाग के जंगलों में सड़कों के किनारे से लेकर दूर जंगलों तक नीलकुरेंजी अपनी आभा बिखेर रहा है। 
यह फूल बारह साल के अंतराल में खिलता है, इसलिए इसे इसे दुर्लभ फूलों में शुमार किया गया है। नीलकुरेंजी के खिलने का समय अगस्त से नवंबर की बीच है। इसके फूल से लेकर पत्तों तक में कई औषधीय गुण हैं। यह पशुओं के लिए चारे का काम भी करता है।
वर्ष 2018 में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नीलकुरेंजी के फूल का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि महाकुंभ मेला 12 साल में लगने की बात तो हम सब जानते हैं, लेकिन यह नहीं जानते कि नीलकुरेंजी का फूल भी 12 साल में एक बार ही खिलता है। 
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