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संतान की लंबी आयु के लिए किया जाता है अहोई अष्टमी व्रत

संतान की लंबी आयु के लिए किया जाता है अहोई अष्टमी व्रत

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 25 दिन 9 घंटे पूर्व
19/10/2019
भोपाल [ महामीडिया ]कार्तिक मास में आने वाले व्रतों में से एक प्रमुख व्रत अहोई अष्टमी है। इस दिन संतान की सुख समृद्धि और उसकी लंबी आयु की कामना की जाती है। इस दिन विधि-विधान से देवी की आराधना की जाती है और उनसे अपनी संतान के लिए आरोग्य, बेहतर जिंदगी और लंबी आयु का वरदान मांगा जाता है।कार्तिक मास को त्यौहारों का मास कहा जाता है। इस महीने में हिंदू धर्म के कई बड़े त्यौहार आते हैं। ये व्रत और त्यौहार सनातन संस्कृति का अहम हिस्सा है जिससे सनातन परंपरा समृद्ध होती है और पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों की डोर मजबूत होती है। कार्तिक मास में आने वाला एक ऐसा ही व्रत है अहोई अष्टमी। यह व्रत कार्तिक महीने की अष्टमी तिथि को किया जाता है। इस साल यह व्रत 21 अक्टूबर सोमवार को है।अष्टमी तिथि देवी गौरी को समर्पित है। इस दिन मां गौरी के अहोई स्वरूप की पूजा की जाती है। इस दिन निसंतान महिलाएं संतान की कामना के लिए और जिन महिलाओं को संतान है वे संतान की उन्नति के लिए इस व्रत को करती है। इस व्रत में चांदी कि अहोई बनाकर उसकी पूजा की जाती है। अहोई में कुछ चांदी के मनके भी डाले जाते हैं। हर साल व्रत वाले दिन इन मनकों में एक मनका बढ़ाया जाता है। पूजा के पश्चात महिलाएं इस माला को पहनती हैं।कार्तिक स्नान की ऐसी प्राचीन काल में एक शहर में एक साहुकार रहता था। उस साहुकार के सात बेटे थे और सातों की शादी हो चुकी थी इसलिए घर में सात बहूओं का आगमन हो चुका था। साहुकार की एक बेटी थी जो दीपावली मनाने के लिए अपने मायके आई हुई थी। दीपावली के अवसर पर घर की साफ-सफाई और घर को लीपने के लिए जब सातों बहुएं जंगल में गई तो उनके साथ उनकी ननद भी गई। साहुकार की बेटी जिस स्थान से मिट्टी निकाल रही थी उस स्थान पर एक साही अपने बेटों के साथ निवास करती थी। मिट्टी खोदते समय गलती से साहूकार की बेटी ने खुरपी से साही का एक बच्चा चोंट लगने से मर गया। साही साहुकार की बेटी पर आगबबूला हो गई और उसने कहा कि वह उसकी कोख को बांध देगी।साही की बात सुनकर साहूकार की बेटी अपनी सभी भाभियों से उनकी कोख बंधवाने की विनती करती है। उसकी विनती पर उसकी सबसे छोटी भाभी अपनी ननद के बदले अपनी कोख बंधवाने के लिए तैयार हो गई। इसके बाद छोटी पुत्रवधु के सभी बच्चे सात दिन बाद मर जाते हैं। अपने सातों पुत्रों को अपने सामने खो देने के बाद उसने पंडित को बुलवाकर इसकी वजह पूछी। इसके बाद पंडित ने सुरही गाय की सेवा करने की सलाह दी।सुरही गाय छोटी बहु की सेवा से प्रसन्न होकर उसको साही के पास ले जाती है। रास्ते में दोनों थककर आराम करने लगते हैं। तभी छोटी बहू की नज़र एक सांप पर जाती है, जो गरूड़ के बच्चे को डंसने ही वाला था। वह सांप को मार डालती है। थोड़ी देर में गरूड़ पंखनी वहां आ जाती है और अपने घोसले में खून बिखरा देखकर उसको लगता है कि छोटी बहु ने उसके बच्चे की जान ले ली है। तो वह छोटी बहू पर हमला कर देती है। छोटी बहू जब गरूड़ पंखनी को हकीकत बताती है तो वह छोटी बहु को सुरही सहित साही के पास पहुंचा देती है।साही छोटी बहू की सेवा से प्रसन्न होकर उसे सात पुत्र और सात बहुएं होने का आशीर्वाद देती है। साही का आशीर्वाद फलीभूत होता है और छोटी बहु का घर पुत्र और पुत्रवधुओं से आबाद हो जाता है।

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