महामीडिया न्यूज सर्विस
सुख-समृद्धि का त्यौहार है 'दीपावली'

सुख-समृद्धि का त्यौहार है 'दीपावली'

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 30 दिन 5 घंटे पूर्व
21/10/2019
भोपाल (महामीडिया) 'दीपावली' हिंदुओं का बड़ा और प्रमुख त्‍यौहार है, जिसे अंधेरे पर प्रकाश की जीत के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। कार्तिक महीने की अमावस्या के दिन दीपावली यानी दिवाली का त्योहार मनाया जाता है। इस बार दीपावली 27 अक्‍टूबर 2019 को मनाई जाएगी। विदेशों में भी जहां-जहां भारतीय मूल के लोग निवास करते हैं परंपरागत ढंग से इसे मनाते हैं। इस दिन नगरों तथा महानगरों की छटा तो देखने योग्य होती है। लोग अपने-अपने हिसाब से देवी महालक्ष्मी का पूजन करते हैं तथा एक-दूसरे का अभिवादन करते हैं। तत्पश्चात् बालक-वृद्घ, युवक-युवतियां मिल-जुलकर पटाखें-फुलझडिय़ां-बमों आदि का आनंद उठाते हैं। चारों तरफ बमों, रॉकेटों, की आवाजें तथा फुलझड़ी पटाखों की रोशनियां बिखरती रहती हैं। मंदिरों में भी भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाता है। दीपावली पर प्राय: सभी वर्ग के लोगों को आर्थिक लाभ भी होता है। ऐसी कोई वस्तु नहीं है जिसकी कुछ न कुछ खपत दीपावली पर न होती हो। दीपावली ही  एकमात्र ऐसा त्यौहार है जो हमारे दो महान अवतारों राम तथा कृष्ण से जुड़ा हुआ है। दीपावली का दूसरा दिन गोवर्धन पूजा का होता है। इस दिन गोबर से गोवर्धन पर्वत की अनुकृति बनाकर उसकी पूजा की जाती है। पशुओं को नहला-धुलाकर उनका श्रृंगार किया जाता है। मंदिरों में अन्नकूट मनाया जाता है जिसमें अनेक प्रकार की साग-सब्जियां एवं पकवान बनाए जाते हैं। मानव का पशुओं के प्रति प्रेम तथा करूणा प्रकट करने का यह एकमात्र त्यौहार है। दीपावली के त्यौहार के संबंध में किवदंती है कि (1) अयोध्या के राजा राम चौदह वर्ष के लम्बे बनवास के बाद लंका के राजा रावण को मारकर अपनी पत्नी सीता तथा भ्राता लक्ष्मण के साथ इसी दिन अयोध्या वापिस लौटे थे। उनके आने  की खुशी में अयोध्यावासियों ने अपने-अपने घरों को पूर्ण रूप से लिपाई-पुताई करके साफ-स्वच्छ तथा पवित्र कर रखा था। सारी अयोध्या नगरी रंग बिरंगे फूलों-पत्तियों तथा बंदनवारों से सज्जित थी। अयोध्या नगरी के समस्त घरों की मुंडेरों पर दीपकों की इतनी कतारें लगाकर रोशनी की गई थी कि अमावस्या की अंधेरी रात भी पूर्णमासी की उजली रात में बदल गई थी। ऐसा लगता था मानों देवराज इंद्र की इंद्रपुरी ही पृथ्वी पर उतर आई हो। इसीलिए हम आज भी भगवान  राम की याद में इस दिन अपने-अपने घरों तथा प्रतिष्ठानों की पूर्ण सफाई करते हैं तथा सारे शहर को रोशनी से जगमग करते हैं। (2) कुछ लोगों की मान्यता है कि इसी दिन मां दुर्गा ने शुम्भ-निशुंभ नामक दो भंयकर अत्याचारी राक्षसों का वध करके लोगों को भय मुक्त किया था। (3) कुछ लोगों के अनुसार इस दिन अद्र्घरात्रि के पश्चात् धन तथा वैभव की देवी महालक्ष्मी क्षीरसागर स्थित अपने निवास से विश्व-भ्रमण करने को निकलती है तथा जो भी घर उन्हें सबसे ज्यादा सुंदर, स्वच्छ तथा पवित्र लगता है उसी पर वह अपनी विशेष कृपा दृष्टि करके उसे धन-धान्य से पूर्ण कर देती है। इन्हीं मान्यताओं के कारण हम अपने घरों तथा प्रतिष्ठानों की संपूर्ण सफाई-रंग-रोगन तथा मरम्मत आदि करते हैं तथा उन पर सजावट तथा रोशनी करते हैं तथा रात्रि को महालक्ष्मी का पूजन करते हैं। 
दिवाली तिथि तथा पूजा का मुहूर्त 
27 अक्टूबर 2019 (रविवार) की दोपहर 12:13 से अमावस्या तिथि का आरंभ होगा। इसी दिन दिवाली का त्योहार मनाया जाएगा। 28 अक्टूबर (सोमवार) को अमावस्या तिथि सुबह 09.09 पर समाप्त हो जाएगी। दिवाली के दिन माता लक्ष्मी की पूजा बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। शुभ मुहूर्त में पूजा करने से घर में लक्ष्मी का निवास होता है। लक्ष्मी पूजन के लिए प्रदोष काल बेहद शुभ माना जाता है। 27 अक्टूबर के दिन 17:40 से 20:16 तक प्रदोष काल रहेगा। प्रदोष काल में भी स्थिर लग्न का समय सबसे उत्तम रहता है। इस दिन 18:42 से 20:37 के दौरान वृष लग्न रहेगा। प्रदोष काल और स्थिर लग्न दोनों रहने से मुहुर्त बहुत ही शुभ रहेगा। 
दिवाली पूजा 
माना जाता है कि दिवाली के दिन माता लक्ष्मी प्रसन्न हो जाती हैं तो व्यक्ति के जीवन में धन संपदा से जुड़ी कोई परेशानी नहीं आती है। इस दिन शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश और सरस्वती माता की भी पूजा की जाती है। धार्मिक ग्रथों के अनुसार कार्तिक माह की अमावस्या को माता लक्ष्मी स्वयं धरती पर आती हैं और हर घर का दौरा करती हैं। उन्हें जो घर सबसे साफ़ सुथरा और जगमगाता हुआ नजर आता है वहां वो निवास कर जाती हैं। इस दिन लक्ष्मी पूजन के साथ कुबेर जी की पूजा का भी खास महत्व है। 
कुछ बातों का ध्यान रखकर ऐसे करें दिवाली पर लक्ष्मी पूजा 
माता लक्ष्मी उसी घर में निवास करती हैं जहां स्वच्छता हो। पूजा से पहले घर की अच्छी सफाई कर लें। घर के वातावरण को शुद्ध करने के लिए गंगाजल का छिड़काव करें। आप घर के द्वार पर माता के स्वागत के लिए रंगोली बनाएं और दीप जलाएं। घर के मंदिर में एक चौकी रखें और उस पर लाल रंग का वस्त्र बिछाकर लक्ष्मी जी और गणेश भगवान की तस्वीर या मूर्ति रखें। चौकी के पास जल से भरा कलश रखें। अब माता लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति पर तिलक लगाएं। दिया जलाएं और फिर जल, चावल, मौली, फल, गुड़, हल्दी, अबीर आदि अर्पित करें। अब माता महालक्ष्मी की स्तुति करें। इनके साथ सरस्वती माता, काली मां, भगवान विष्णु और कुबेर देव की पूरी विधि से पूजा करें। लक्ष्मी पूजा के बाद घर की तिजोरी, बहीखाते आदि की पूजा करें। कोशिश करें की लक्ष्मी पूजा के दौरान पूरा परिवार साथ हो। पूजा की समाप्ति के बाद सबको प्रसाद दें। अपनी आस्था के अनुसार दान दक्षिणा दें।

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