महामीडिया न्यूज सर्विस
आस्था का केंद्र है शहडोल स्थित पचमठा मंदिर

आस्था का केंद्र है शहडोल स्थित पचमठा मंदिर

admin | पोस्ट किया गया 7 दिन 19 घंटे पूर्व
04/11/2019
शहडोल (महामीडिया) शहडोल जिला मुख्यालय से करीब 15 किमी दूर सिंहपुर गांव में स्थित पचमठा मंदिर पांडवकाल की याद दिलाता है। यहां 11 रुद्री शिवलिंग स्थापित थे। मंदिर करीब पांच हजार साल पुराना बताया जाता है। इसका इतिहास उज्जैन के महाकाल मंदिर से मिलताजुलता भी बताया जाता है। जिस समय यह मंदिर बना था उस समय यहां की भव्यता और विशालता की कहानियां आसपास के क्षेत्रों में आज भी काफी प्रसिद्ध हैं। यही वजह है कि आज भी सिंहपुर का पचमठा मंदिर दर्शनीय और लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। मंदिर में स्थापित शिवलिंग की पूजा-अर्चना के बाद 11 मार्ग से लोग परिक्रमा करते थे। अभी यहां पर नौ मार्ग बचे हुए हैं, जबकि दो मार्ग टूट चुके हैं। प्रचलित है कि मुगलकाल में औरंगजेब के समय यहां की प्रतिमाओं को खंडित कर दिया गया था। आज भी उसके अवशेष दिखाई देते हैं। वे स्थान खाली हैं जहां कभी मूर्तियां स्थापित थीं। स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि यह बहुत ही सिद्ध स्थल है और गोंड राजाओं के जमाने में यहां की भव्यता देखते ही बनती थी।
पचमठा मंदिर की दीवार और दरवाजों पर पत्थर में उकेरी गई नक्काशी को देखकर ही लगता है कि इसे बनाने में काफी समय लगा होगा। मंदिर की प्राचीनता भी इसी बात से समझ में आती है कि यहां जैसी स्थापत्य कला 2000 साल पुराने मंदिरों में ही नजर आती है।
मंदिर में करीब 12 साल पहले पुरातत्व विभाग ने अपना ताला डाल दिया था और आज यहां विभाग का सिर्फ चौकीदार रहता है। पचमठा की सुंदरता बाहर से भी बहुत ही रमणीक नजर आती है। बताया जाता है कि यहां पर पांडवों ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। 
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