महामीडिया न्यूज सर्विस
सबरीमाला, राफेल जेट सहित 4 बड़े मामले पर सर्वोच्च न्यायालय अगले हफ्ते तक दे सकता हैं अहम फैसला

सबरीमाला, राफेल जेट सहित 4 बड़े मामले पर सर्वोच्च न्यायालय अगले हफ्ते तक दे सकता हैं अहम फैसला

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 29 दिन 21 घंटे पूर्व
10/11/2019
नई दिल्ली [ महामीडिया ]अयोध्या भूमि विवाद मामले पर ऐतिहासिक फैसला सुनाने के बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली सर्वोच्च न्यायालय की बेंच 17 नवंबर के पहले चार अन्य महत्वपूर्ण फैसले दे सकती है। इसमें केरल के सबरीमाला मंदिर और राफेल जेट खरीद का केस भी शामिल होगा। बताते चलें कि 17 नवबंर को सीजेआई अपने पद से रिटायर हो रहे हैं। इससे पहले वह लंबित पड़े बड़े फैसलों को सुनाना चाहते हैं।बेंच ने एक अन्य राजनीतिक संवेदनशील मामले में अपना फैसला सुनाएगी, जिसमें 14 दिसंबर 2018 को एक समीक्षा मांगी गई थी, जिसके द्वारा नरेंद्र मोदी-सरकार को राफेल लड़ाकू जेट की खरीद में क्लीन चिट दी गई थी। उनकी पीठ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक अवमानना ​​की कार्यवाही करने की याचिका पर भी अपना फैसला सुनाएगी, जिसमें शीर्ष अदालत ने मोदी के खिलाफ राफेल मामले के संबंध में उनकी "चौकीदार चोर है" टिप्पणी को गलत ठहराया है।इसके अलावा, गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश करने की अनुमति देने वाले शीर्ष अदालत के फैसले की समीक्षा करने की याचिका पर फैसला सुनाएगी। बताते चलें कि सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश को लेकर केस किया गया है। कोर्ट ने पिछले साल 28 सितंबर को केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी को लिंग आधारित भेदभाव ठहराते हुए रद्द कर दिया था।कोर्ट का यह फैसला महिलाओं पर यह मासिक धर्म की वजह से मंदिर में प्रवेश पर लगी पाबंदी के खिलाफ था। कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने 4-1 से यह फैसला महिलाओं के पक्ष में सुनाया था वहीं इस बेंच की सदस्य जस्टिस इंदू मल्होत्रा ने बहुमत से असहमति जताई थी। इस फैसले का अयप्पा अनुयायी भारी विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि मंदिर के भगवान अयप्पा ब्रम्हचारी हैं और इस आयु की महिलाओं के प्रवेश से मंदिर की प्रकृति बदल जाएगी। फैसले के खिलाफ 55 पुनर्विचार याचिकाओं सहित कुल 65 याचिकाएं कोर्ट में हैं।इसके साथ ही साथ 4 अप्रैल को रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने साल 2010 में सर्वोच्च न्यायालय के महासचिव और इसके केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर तीन अपीलों पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जो CJI के कार्यालय के अधीन सूचना का अधिकार  अधिनियम के दायरे में आता है।

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